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मऊ विधानसभा सीट पर शुरु सियासी जंग।

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मऊ विधानसभा सीट पर शुरु सियासी जंग।

Mau Vidhan Sabha Fight:माफिया मुख्तार अंसारी के गढ़ मऊ से उसके बेटे व सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी को भड़काऊ भाषण मामले में दो साल की सजा मिलने के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता खत्म होते ही अघोषित रूप से चुनाव की डुगडुगी बच गई है।भले ही निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन पार्टियों में व्याकुलता बढ़ गई है। भाजपा-सुभासपा और सपा अभी से उपचुनाव की तैयारियों में जुट गई हैं। पिछले दस वर्षों में मऊ विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में सुभासपा ने हर बार अहम भूमिका निभाई है।संभावना है कि अब्बास के पक्ष में फैसला आएगा।

अगर उपचुनाव की नौबत आती है तो चाहे कुछ भी हो, हमारे टिकट पर हमारा ही प्रत्याशी उपचुनाव में उतरेगा। एनडीए गठबंधन के शीर्ष नेताओं के सामने भी इसे मजबूती से रखा जाएगा। 2022 का विधानसभा चुनाव सुभासपा ने सपा गठबंधन के साथ लड़ा था।

मऊ सदर से पांच बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी ने सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा उम्मीदवार अशोक सिंह को 38,116 वोट से हराकर पहली बार विधायक बने। अब अब्बास को सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म होने की अधिसूचना जारी हो गई है और राजनीतिक दलों में उपचुनाव को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है।मऊ सदर सीट से गठबंधन चाहे भाजपा या सपा के साथ रहा हो, प्रत्याशी हर बार सुभासपा का ही लड़ा। हालांकि भाजपा गठबंधन के बावजूद सुभासपा को घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में दारा सिंह चौहान और लोकसभा चुनाव में अरविंद राजभर को हार का मुंह देखना पड़ा था।

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