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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को मिल रही उड़ान, मुखराई और जैत गांव बन रहे आत्मनिर्भरता के केंद्र

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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को मिल रही उड़ान, मुखराई और जैत गांव बन रहे आत्मनिर्भरता के केंद्र

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पर्यटन नीति-2022 राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा पर्यटन को ग्रामीण विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और स्थानीय रोजगार के साथ जोड़ने की कोशिश अब फलीभूत होने लगी है। पर्यटन विभाग के प्रयासों से अब तक प्रदेश में 700 से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मथुरा जिले के मुखराई और जैत गांव ग्रामीण पर्यटन की नई पहचान बनकर उभरे हैं। इन गांवों में न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षक होम स्टे विकल्प उपलब्ध हैं, बल्कि स्थानीय परंपराएं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियां भी पर्यटकों के लिए विशेष अनुभव बन रही हैं।मुखराई गांव, जो राधा रानी के ननिहाल के रूप में विख्यात है, अपनी खास चरकुला नृत्य परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां की महिलाएं सिर पर जलते हुए दीपकों को संतुलन में रखकर जो नृत्य प्रस्तुत करती हैं, वह पर्यटकों को सम्मोहित कर देता है। गोवर्धन, बरसाना, वृंदावन और कृष्ण जन्मभूमि जैसे पावन स्थलों की निकटता मुखराई को एक धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन हब बना रही है।गांव के प्रधान जगदीश प्रसाद ने बताया कि यहां आने वाले पर्यटकों को न केवल पारंपरिक भोजन और जीवनशैली का अनुभव मिलता है, बल्कि वे स्थानीय पोशाक बनते हुए देख सकते हैं और स्वयं भी सीख सकते हैं। यही अनुभव मुखराई को शहरी जीवन से ऊबे पर्यटकों के लिए एक अनोखा गंतव्य बनाता है।इसी तरह मथुरा का जैत गांव भी ग्रामीण पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरा है। ग्राम प्रधान ममता देवी ने बताया कि गांव में तुलसी माला निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाया गया है। सरकार ने प्रशिक्षण और मशीनें उपलब्ध कराकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग दिया है। यहां आने वाले पर्यटक माला बनते देख सकते हैं और खुद भी बना सकते हैं। इसके अलावा, मिट्टी के बर्तनों की कार्यशालाएं भी पर्यटकों को लुभा रही हैं।मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानसून का मौसम ग्रामीण पर्यटन के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। इस समय हरियाली अपने चरम पर होती है, गांवों में त्योहारों और कृषि गतिविधियों की रौनक देखते ही बनती है। उन्होंने कहा कि शहरी शोर-शराबे से दूर भारतीय संस्कृति की जड़ों को महसूस करना हो तो मुखराई और जैत जैसे गांव आदर्श स्थल बनते जा रहे हैं।पर्यटन विभाग ऐसे गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक आकर्षित हों और स्थानीय लोगों को आजीविका के नए अवसर मिल सकें। प्रदेश सरकार की इस पहल से उत्तर प्रदेश न सिर्फ पर्यटन के नए नक्शे पर उभर रहा है, बल्कि गांवों को आर्थिक स्वावलंबन की ओर भी अग्रसर कर रहा है।

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