
जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में लघु सिंचाई योजनाओं की समीक्षा बैठक सम्पन्न, जल संरक्षण व संवर्द्धन पर दिया गया जोर
जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में लघु सिंचाई योजनाओं की समीक्षा बैठक सम्पन्न, जल संरक्षण व संवर्द्धन पर दिया गया जोर
लखनऊ: उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में सोमवार को लघु सिंचाई विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की एक अहम समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने की। बैठक में नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अंतर्गत चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और जनपदवार प्रस्तुतिकरण के माध्यम से जमीनी हकीकत की जानकारी ली गई।बैठक में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने महोबा जनपद का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे तालाबों के जीर्णोद्धार, चेकडैम निर्माण और वर्षा जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से जल संरक्षण एवं संवर्द्धन का काम सफलतापूर्वक किया गया। महोबा के कबरई और चरखारी विकासखंड, जो पहले अतिदोहित श्रेणी में थे, अब सुरक्षित श्रेणी में आ चुके हैं। इससे न केवल वहां की जल समस्या में सुधार आया है, बल्कि किसान अब मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत कराई जा रही अनुदानित बोरिंग से सिंचाई कर अपनी आय को दुगुना कर रहे हैं।मंत्री ने भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 82 विकासखंड अतिदोहित श्रेणी में थे, जो अब घटकर 50 रह गए हैं। यह लघु सिंचाई विभाग द्वारा किए गए जल संरक्षण प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने भविष्य में सभी विकासखंडों को सुरक्षित श्रेणी में लाने की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।स्वतंत्र देव सिंह ने अधिकारियों से कहा कि तालाबों के वृहद सर्वेक्षण के बाद उनके जीर्णोद्धार की परियोजनाएं तैयार की जाएं। इसके साथ ही आस-पास के किसानों को अनुदान पर सोलर पंपसेट उपलब्ध कराकर सिंचाई की सुविधा दी जाए, जिससे बोरिंग पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके और भूजल संतुलन बना रहे।बैठक में अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग अनुराग श्रीवास्तव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तालाबों व झीलों से अवैध कब्जे हटाए जाएं और उन्हें पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जल संचयन और जल दोहन के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।मुख्य अभियंता, लघु सिंचाई विभाग देवेंद्र कुमार ने विभागीय कार्यों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया, जिस पर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया। बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद, विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अधिकारी, और लघु सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता एवं सहायक अभियंता मौजूद रहे।यह बैठक प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर हो रहे ठोस प्रयासों की पुष्टि करते हुए जल संकट से निपटने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हुई।
