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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर डीआरडीआई, लखनऊ में संगोष्ठी और माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर डीआरडीआई, लखनऊ में संगोष्ठी और माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू के संरक्षण और प्रवर अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्गदर्शन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर संस्थान प्रांगण में स्थापित उनकी विशालकाय प्रतिमा पर अधिकारियों, कार्मिकों, प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों और विशिष्ट अतिथि वक्ताओं ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के क्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशानुसार संस्थान के बुद्धा सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन दर्शन, राष्ट्र प्रेम और उनका अप्रतिम एकात्म मानववाद रहा। इस अवसर पर विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़े प्रतिभागियों, विषय विशेषज्ञों और अतिथि वक्ताओं ने अपने विचार रखे।अतिथि वक्ताओं में इस्कॉन संगठन के आध्यात्मिक गुरु दिव्य मिताई दास और भारत चरित्र निर्माण संस्थान, नई दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष रामकृष्ण गोस्वामी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के वैचारिक दर्शन और मिशन कर्मयोगी पर विस्तृत व्याख्यान दिए। उन्होंने बताया कि उपाध्याय जी के विचार केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे, बल्कि मानवता के कल्याण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाले थे।प्रवर अपर निदेशक सुबोध दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित उपाध्याय का एकात्म मानववाद केवल आर्थिक या राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का प्रतिबिंब है। उनका मानना था कि मनुष्य शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का समन्वित रूप है और जब तक इन चारों पहलुओं का विकास समान रूप से नहीं होगा, वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचारक और दूरदर्शी राजनेता थे। उन्होंने भारतीय परंपरा और संस्कृति से प्रेरित एकात्म मानववाद प्रस्तुत किया, जो पश्चिमी पूंजीवाद और साम्यवाद दोनों से भिन्न है। उनका अंत्योदय का सिद्धांत आज भी राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक है।इस अवसर पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों — “अग्नि आपदा प्रबंधन” और ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “लोक-ओएस तकनीकी शैली आधारित” प्रशिक्षण के प्रतिभागियों ने भी अपने विचार साझा किए।राज्य मद्यनिषेध अधिकारी आर.एल. राजवंशी ने भी पंडित उपाध्याय के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक राजीव कुमार दूबे ने किया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रवर अपर निदेशक सुबोध दीक्षित ने प्रस्तुत किया।इस आयोजन के सफल प्रबंधन में उप निदेशक डॉ. नीरजा गुप्ता, सरिता गुप्ता, आर.के. मल्ल, सहायक निदेशक डॉ. राज किशोर यादव, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, संजय कुमार, आपदा प्रबंधन सलाहकार कुमार दीपक और संस्थान के समस्त संकाय सदस्यों व कार्मिकों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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