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अजय राय ने की शंकराचार्य से मुलाकात।

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अजय राय ने की शंकराचार्य से मुलाकात।

उत्तर प्रदेश Live:  उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने हाल ही में संत और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से भेंट की, जिससे राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस मुलाकात का मकसद दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में सामाजिक एकता, धर्म और राजनीति के संतुलन, तथा समाज के कमजोर वर्गों की भलाई पर चर्चा हुई। अजय राय ने संत के सामने प्रदेश में बढ़ रहे सामाजिक तनाव और लोगों की समस्याओं का हवाला देते हुए शांति और समरसता बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस दौरान कहा कि धर्म और राजनीति अलग अलग क्षेत्र हैं, लेकिन समाज की भलाई के लिए दोनों को संवाद और समझ के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने लोगों को हर परिस्थिति में संयम और शांति बनाए रखने का संदेश दिया। मुलाकात में दोनों पक्षों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के मुद्दों पर भी विचार साझा किए। मीडिया को दिए गए बयान में अजै राय ने कहा कि यह बैठक केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि एक सकारात्मक शुरुआत है, जिसमें धर्म और राजनीति के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह की बैठकें स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों पर संतों और धार्मिक नेताओं के साथ संवाद स्थापित करने की दिशा में सक्रिय है। वहीं, संत की भागीदारी इसे केवल राजनीतिक maneuvering नहीं बल्कि एक सामाजिक संवाद के रूप में दिखाती है।

भेंट के दौरान उठाए गए मुख्य मुद्दों में गरीबों और दलितों के कल्याण, धार्मिक स्थलों के रखरखाव, और समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उपाय शामिल थे। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी भी राजनीतिक या सामाजिक विवाद को हिंसा या तनाव पैदा करने के बजाय संवाद और समझ के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए

अजय राय ने कहा कि संत से हुई यह चर्चा उन्हें नई दिशा और समाज के लिए जिम्मेदारी का एहसास दिलाने वाली रही। वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि नेताओं और धार्मिक व्यक्तित्वों को मिलकर समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।

राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य में इस तरह की चर्चाएं और मुलाकातें न केवल सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी हैं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देती हैं कि पार्टी धर्म और समाज के मुद्दों पर संवेदनशील है। वहीं संत का पक्ष इसे जनता और समाज के बीच संवाद का सकारात्मक उदाहरण बनाता है।

इस पूरी मुलाकात को स्थानीय और राज्य स्तरीय मीडिया ने प्रमुखता से कवर किया है, और सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो और फोटो तेजी से वायरल हो रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी बैठकें भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने के साथ-साथ लोगों के बीच शांति और संवाद की भावना को भी मजबूत करती हैं।

अंततः यह मुलाकात यह संदेश देती है कि राजनीतिक नेताओं और धार्मिक नेताओं के बीच संवाद से समाज में संतुलन और समझ पैदा हो सकती है। चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण या धर्म के मुद्दे हों, दोनों पक्षों ने मिलकर इस दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

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