
महाविनाश के डर से पीछे हटे Trump?
IRAN US TENTION: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई थीं, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के एक बड़े बयान ने वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि उन्हें ईरान के साथ किसी डील की “कोई जल्दी नहीं” है। इस बयान के बाद दुनिया भर में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अमेरिका अब टकराव से पीछे हट रहा है? क्या महाविनाश की आशंका के बीच वॉशिंगटन ने अपनी रणनीति बदल दी है?
दरअसल पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा था। मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां, इज़राइल-ईरान विवाद, परमाणु कार्यक्रम को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और अमेरिकी चेतावनियों ने दुनिया को एक बड़े युद्ध के डर में डाल दिया था। कई विशेषज्ञ यह तक कह रहे थे कि अगर हालात बिगड़े तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है। लेकिन अब ट्रंप के नए बयान ने संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल सीधी टक्कर से बचना चाहता है।
कोस्ट गार्ड अकादमी समारोह के दौरान Donald Trump ने कहा कि इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ईरान के मुद्दे पर “वही करेंगे जो मैं चाहूंगा।” ट्रंप का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब भी इज़राइल की रणनीति पर मजबूत प्रभाव बनाए हुए है। साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें किसी समझौते या डील की जल्दबाजी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर ईरान को संदेश देने के साथ-साथ अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी शांत करने की कोशिश हो सकता है।

ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि ट्रंप की विदेश नीति लगातार भ्रम पैदा कर रही है। कभी कड़ा रुख, कभी बातचीत की बात और अब “जल्दी नहीं” वाला बयान—इन सबने अमेरिकी सहयोगियों को भी असमंजस में डाल दिया है। वहीं ट्रंप समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रपति युद्ध नहीं, बल्कि “Peace Through Strength” यानी ताकत के जरिए शांति की नीति पर काम कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर अमेरिकी मिडटर्म चुनावों पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका किसी बड़े युद्ध में उलझता, तो उसका सीधा असर तेल की कीमतों, महंगाई और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ता। ऐसे में ट्रंप प्रशासन फिलहाल युद्ध से बचते हुए दबाव की राजनीति अपनाना चाहता है। यही वजह है कि ट्रंप के बयान को चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
उधर ईरान की तरफ से भी लगातार बयान सामने आ रहे हैं कि वह किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। तेहरान पहले ही साफ कर चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो जवाब भी बेहद कड़ा होगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और पश्चिमी देश बेवजह तनाव बढ़ा रहे हैं।
इस बीच पूरी दुनिया की नजर अब इज़राइल पर भी टिकी हुई है। क्योंकि अगर इज़राइल ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य कदम उठाता है, तो अमेरिका पर भी सीधे तौर पर दबाव बढ़ सकता है। ट्रंप का यह कहना कि Netanyahu वही करेंगे जो वह चाहेंगे, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वॉशिंगटन अभी हालात को पूरी तरह नियंत्रण में रखना चाहता है।
सोशल मीडिया पर भी इस बयान के बाद जबरदस्त प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रंप युद्ध से पीछे हट गए हैं, जबकि कुछ इसे रणनीतिक चाल बता रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह “सरेंडर” नहीं बल्कि तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हालात कब बदल जाएं, यह कहना अभी मुश्किल है।
फिलहाल इतना जरूर है कि Donald Trump के इस बयान ने दुनिया में छिड़ी युद्ध की आशंकाओं को कुछ समय के लिए धीमा कर दिया है। लेकिन अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच चल रहा शक्ति संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें वॉशिंगटन, तेहरान और तेल अवीव पर टिकी रहेंगी, क्योंकि एक छोटा फैसला भी वैश्विक राजनीति को पूरी तरह