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ग्लैण्डर्स एवं फार्सी रोग एक लाइलाज बीमारी है, जिसका बचाव मात्र सतर्कता

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कन्नौज : बीमारियों का करें बचाव बीमारी से बचें घोड़े, गधे एवं खच्चरों में फफोले आदि दिखने पर तत्काल मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में अवगत कराएं।उक्त जानकारी आज प्रभारी जिलाधिकारी/ अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार ने  कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित पशु चिकित्सकों व कार्मिकों को दी। प्रशिक्षण में बताया गया कि ग्लैण्डर्स एवं फार्सी रोग प्रथम बार सं 1881 में मुख्यतः घोड़े, गधों एवं खच्चरों में पाया गया था। इस रोग के संबंध में प्रथम बार सं 1664 में जानकारी हुई कि यह जानवर से जानवर में सांस व खुले घाव के संपर्क में आने से फैलता है, उसके पश्चात सन 1830 में पाया गया कि यह बैक्टीरिया जनित बीमारी जानवरों से इंसान में भी व्यग्र रूप में फैल सकती है तथा इस बैक्टीरिया का प्रयोग विश्व युद्ध प्रथम व द्वितीय में भी बायो हथियार के रूप में किया गया था।

 

प्रशिक्षण डॉ0 दिनेश कुमार गुप्ता द्वारा दिया गया जिसमें बताया गया कि यह एक लाइलाज बीमारी है इएलिये इससे क्षुब्ध घोड़े, गधे, खच्चर आदि को दया मृत्यु दिए जाने का प्रावधान है, जिसके मुआवजे के तहत घोड़े पर राज्य सरकार द्वारा रु0 25000, एवं गधे, खच्चर आदि पर रु0 16000 संबंधित व्यक्ति को नियमानुसार दिया जाता है। प्रशिक्षण में इस बीमारी के संबंध में विस्तार से चर्चा करते हुए इसके रोकथाम व उपाय के संबंध में सभी को अवगत कराया गया।प्रशिक्षण में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 अनिल कुमार सिंह,  अपर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 संजय शल्या, डॉ0 दिनेश कुमार गुप्ता सहित अन्य पशु चिकित्सक व कर्मचारी उपस्थित  रहे

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