
बकरीद से पहले कोलकाता इमाम की अपील: गाय की नहीं, दूसरे जानवरों की दें कुर्बानी
KOLKATA LIVE:बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है, जिसने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। कोलकाता की ऐतिहासिक नाखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे इस बार गाय की कुर्बानी से बचें और दूसरे जानवरों की कुर्बानी दें। इमाम ने कहा कि देश में आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सबसे जरूरी है, इसलिए सभी लोगों को दूसरे धर्मों की भावनाओं का भी सम्मान करना चाहिए।
मौलाना शफीक कासमी ने अपने बयान में कहा कि इस्लाम शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी काम से दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं, तो उससे बचना चाहिए। इमाम ने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि बकरीद के मौके पर सरकार द्वारा जारी नियमों और कानूनों का पूरी तरह पालन किया जाए और ऐसी कोई गतिविधि न हो जिससे विवाद या तनाव की स्थिति पैदा हो।
उन्होंने यह भी कहा कि कुर्बानी इस्लाम का अहम हिस्सा है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल किसी खास जानवर की कुर्बानी नहीं बल्कि त्याग और आस्था का संदेश देना है। इसलिए लोग वैकल्पिक जानवरों की कुर्बानी देकर भी धार्मिक परंपरा निभा सकते हैं। मौलाना के इस बयान को कई लोग सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रहे हैं।

दरअसल, बकरीद के दौरान हर साल कई राज्यों में गाय की कुर्बानी को लेकर विवाद और तनाव की स्थिति बन जाती है। ऐसे में नाखोदा मस्जिद के इमाम की यह अपील काफी अहम मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर है और त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी मौलाना शफीक कासमी का बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग उनकी अपील की तारीफ कर रहे हैं और इसे सामाजिक सद्भाव की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दों से जोड़कर भी देख रहे हैं। हालांकि इमाम ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य केवल शांति और भाईचारा बनाए रखना है।
फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि त्योहार को शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं, अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी विवादित गतिविधि से बचें। अब देखने वाली बात होगी कि मौलाना की इस अपील का समाज पर कितना असर पड़ता है और बकरीद के दौरान कानून-व्यवस्था किस तरह बनाए रखी जाती है।