
मायावती ने राजनीति में गिरते स्तर पर जताई कड़ी चिंता, कहा- ‘घिनौनी स्वार्थ की राजनीति’ से देश का माहौल न बिगाड़ें
मायावती ने राजनीति में गिरते स्तर पर जताई कड़ी चिंता, कहा- ‘घिनौनी स्वार्थ की राजनीति’ से देश का माहौल न बिगाड़ें
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देश की मौजूदा राजनीति में गिरते स्तर पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राजनीतिक स्वार्थ और चुनावी फायदे के लिए जिस तरह अभद्र, अमर्यादित और असंसदीय टिप्पणियों का दौर चल पड़ा है, वह लोकतंत्र और देश की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीति को संविधान, विचारधारा और सिद्धांतों के आधार पर आमजन के हित में संचालित किया जाए।मायावती ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि चुनावी माहौल में नेताओं द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ घृणित और विषैली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इससे न केवल राजनीतिक माहौल दूषित होता है, बल्कि देश और लोकतंत्र की गरिमा भी प्रभावित होती है। हाल ही में बिहार की राजनीति में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति बेहद चिंताजनक है और इससे देश की चिंता बढ़ रही है।बीएसपी प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के अंबेडकरवादी सिद्धांतों और नीतियों पर चलती आई है और यही कारण है कि बीएसपी किसी भी तरह की दूषित और विषैली राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी अपेक्षा की कि वे व्यक्तिगत कटाक्ष और नीचा दिखाने की सस्ती राजनीति से बचें और देश के गरीबों व आमजन के हित में काम करें।मायावती ने इस संदर्भ में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान ने सभी संस्थाओं को उनकी निर्धारित सीमा में रहकर काम करने का निर्देश दिया है। हर संवैधानिक संस्था के लिए ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था संविधान की गारंटी है। यदि इसका पालन सही ढंग से किया जाए, तो हालात बिगड़ने से बचाए जा सकते हैं और लोकतंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि राजनीति को लोकतांत्रिक गरिमा, शालीनता और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि देश आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके।
