
चीनी के दाम ने मचाई तबाही: 10 साल बाद होगी चीनी आयात।
INDIA IMPORT SUGAR:चीनी की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों से लेकर सरकार तक की चिंता बढ़ा दी है।
देश में चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं।
इसी बढ़ती कीमत और घरेलू बाजार में सप्लाई का दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी यानी Raw Sugar को बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दे दी है। खास बात यह है कि करीब 10 साल बाद भारत ने इतनी बड़ी मात्रा में चीनी आयात का फैसला लिया है।
आखिर चीनी के दाम इतने क्यों बढ़ गए? इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में सप्लाई पर बढ़ता दबाव और आने वाले त्योहारों में मांग बढ़ने की आशंका है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। इन मौकों पर मिठाई और दूसरी चीजों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसी वजह से सरकार चाहती है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतें ज्यादा न बढ़ें।

आंकड़ों की बात करें तो 18 अगस्त तक खुदरा चीनी की कीमत करीब 52 रुपये 30 पैसे प्रति किलो पहुंच गई थी, जबकि एक साल पहले यह करीब 46 रुपये 34 पैसे प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर कीमत में करीब 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं कुछ थोक बाजारों में चीनी की कीमतों में इससे भी तेज उछाल देखा गया है। सरकार के मुताबिक कुछ जगहों पर स्टॉक जमा करने और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
अब सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी को बिना ड्यूटी के आयात करने की अनुमति दी है। इसका मकसद बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचाना और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है। सरकार को उम्मीद है कि विदेश से चीनी आने के बाद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में तेजी कुछ कम हो सकती है। हालांकि आयातित चीनी बाजार में पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है, क्योंकि इसे विदेशों से भारत लाने में समय लगता है।
सरकार ने सिर्फ आयात का फैसला ही नहीं किया है, बल्कि चीनी के स्टॉक को लेकर भी सख्ती बढ़ाई है। थोक में चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 15 दिनों की जरूरत तक कर दी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि कोई बड़ी मात्रा में चीनी जमा करके बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न कर सके। इससे सरकार बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रख सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस फैसले से आम आदमी को राहत मिलेगी? अगर आयातित चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और सप्लाई बढ़ती है, तो कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। लेकिन त्योहारों के दौरान मांग कितनी बढ़ती है और घरेलू उत्पादन व स्टॉक की स्थिति कैसी रहती है, इसका असर भी कीमतों पर पड़ेगा।

फिलहाल सरकार का साफ लक्ष्य है कि चीनी की कमी न हो, जमाखोरी पर रोक लगे और त्योहारों के मौसम में आम लोगों को ज्यादा महंगी चीनी न खरीदनी पड़े। यानी आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों पर सरकार और बाजार दोनों की नजर बनी रहेगी।