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स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान को बताया युगधर्म, 10 अगस्त को लखनऊ में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आयोजन

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स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान को बताया युगधर्म, 10 अगस्त को लखनऊ में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आयोजन

लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को राष्ट्रसेवा बताया जाना, स्वदेशी जागरण मंच के लिए न केवल प्रेरणास्पद है बल्कि मंच के दशकों पुराने अभियान की पुनर्पुष्टि भी है। अवध प्रांत के संयोजक अमित कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य का स्वागत करते हुए कहा कि स्वदेशी का रास्ता ही भारत को आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर ले जाएगा।उन्होंने कहा कि 1991 में अपनी स्थापना के बाद से स्वदेशी जागरण मंच देशवासियों को स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के लिए जागरूक करता रहा है। आज जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और संरक्षणवाद का बोलबाला है, तब स्वदेशी राष्ट्रहित की रक्षा का सबसे सशक्त माध्यम बन गया है।अमित सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और अन्य देश टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं से दुनिया के निर्यात को रोक रहे हैं, वहीं चीन जैसे देश अपनी अधिशेष उत्पादन क्षमता का उपयोग कर हमारे बाजारों में घटिया वस्तुएं डंप कर रहे हैं। इससे भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमता को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में स्वदेशी केवल आर्थिक नीतिगत विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्ररक्षा का एक आवश्यक औजार है।स्वदेशी जागरण मंच ने 12 जून 2025 से “स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान” की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य भारत के कोने-कोने में स्वदेशी को लोकप्रिय बनाना और ‘मेक इंडिया ग्रेट अगेन’ के मंत्र को जन-जन तक पहुंचाना है।मंच के जिला संयोजक कुलदीप खरे ने भारत-चीन व्यापार घाटे पर चिंता जताते हुए कहा कि चीन के साथ व्यापार अब न केवल एकतरफा है, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजारों में चीनी सस्ते उत्पाद एमएसएमई को नष्ट कर रहे हैं, नौकरियों को खत्म कर रहे हैं और चीन इन्हीं पैसों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में कर रहा है।अमित सिंह ने मौजूदा डिजिटल ई-कॉमर्स मॉडल पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म भारत के पारंपरिक खुदरा व्यापार को निगलने में लगे हैं। उन्होंने इन्हें 21वीं सदी की नई ईस्ट इंडिया कंपनियों की संज्ञा देते हुए कहा कि ये सिर्फ व्यापार मंच नहीं, बल्कि डिजिटल साम्राज्य हैं जो नीतियों को प्रभावित करने का भी प्रयास करते हैं। मंच ने सरकार से मांग की है कि इन कंपनियों को कड़े नियमों में बांधा जाए, शिकारी मूल्य निर्धारण और एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों पर रोक लगे।स्वदेशी जागरण मंच ने देशवासियों से “स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान” का हिस्सा बनने का आह्वान किया है। इसी क्रम में 10 अगस्त को लखनऊ में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई है। मंच का विश्वास है कि जब भारत स्वदेशी को अपनाएगा, तभी वह सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और महान बनेगा।

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