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अमेरिका के हथियार खत्म: अमेरिका नतमस्तक?

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अमेरिका के हथियार खत्म: अमेरिका नतमस्तक?

IRAN US WAR:ईरान के साथ हुए युद्ध के बाद अब अमेरिका की सैन्य ताकत को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। कई रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि ईरान के खिलाफ लंबे समय तक चले सैन्य अभियान में अमेरिका ने बड़ी संख्या में अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका के पास अब भविष्य के किसी बड़े युद्ध के लिए पर्याप्त हथियार बचे हैं? इसी बीच अमेरिकी रक्षा उद्योग से जुड़ी एक बड़ी खबर भी सामने आई है, जिसमें हथियारों के नए उत्पादन को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका की सेना ने युद्ध के दौरान ATACMS और नई पीढ़ी की PrSM (Precision Strike Missile) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। इन्हीं दावों के आधार पर यह चर्चा तेज हो गई कि अमेरिका के कुछ महत्वपूर्ण हथियारों का भंडार काफी कम हो गया है। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि उसका मिसाइल भंडार लगभग पूरी तरह खत्म हो गया है। इसलिए इस दावे को अभी आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।

इसी बीच अमेरिका ने अपने हथियारों के उत्पादन को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा कंपनी Lockheed Martin को लंबी दूरी की मिसाइलों के निर्माण और आपूर्ति से जुड़े अरबों डॉलर के अनुबंध दिए गए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य की जरूरतों के लिए मिसाइल उत्पादन बढ़ाना और सेना के भंडार को मजबूत करना बताया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धों में मिसाइलों की खपत पहले की तुलना में कहीं अधिक हो गई है, इसलिए कई देश अपने हथियारों के भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं।

अब सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान पर हमला करना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीतिक गलती थी? इस पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे सैन्य अभियानों में हथियारों की भारी खपत स्वाभाविक होती है और इससे किसी देश की रणनीति को पूरी तरह असफल नहीं कहा जा सकता। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी युद्ध के बाद हथियारों का भंडार तेजी से कम हो जाए, तो भविष्य के संभावित संघर्षों के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि वह अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। नई मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, रक्षा बजट में निवेश किया जा रहा है और आधुनिक हथियारों के विकास पर तेजी से काम हो रहा है। अमेरिका का दावा है कि वह किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार है। इसलिए यह कहना कि अमेरिका पूरी तरह कमजोर हो गया है या उसके पास अपनी रक्षा के लिए हथियार नहीं बचे हैं, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर सही निष्कर्ष नहीं होगा।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ईरान के साथ संघर्ष के बाद अमेरिकी रक्षा तैयारियों और हथियारों के भंडार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले समय में अमेरिका कितनी तेजी से अपने मिसाइल भंडार को फिर से भरता है और रक्षा उत्पादन को कितना बढ़ाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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