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जनपद में नैपियर घास क्षेत्र विस्तार को लगे पंख

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‘‘मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया‘‘

गत वर्ष का माह जून अभी कल की बात लगती है जब जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र के निर्देश पर तत्कालीन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. बलवन्त सिंह जनपद सहारनपुर से नैपियर घास का बीज लाये थे। सहारनपुर से मंगाये गये बीजो को डीएम के सरकारी आवास तथा ब्लाक पयागपुर के ग्राम त्रिकोलिया की धरती के सुपुर्द कर दिये गये थे। डीएम आवास पर बोई गई नैपियर घास की फसल डीएम की देख-रेख में इस कदर परवान चढ़ी की यहॉ से उत्पादित नैपियर घास के बीज कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच एवं नानपारा के साथ-साथ समस्त 14 विकास खण्डों में अलग-अलग स्थानों पर लगभग 60 हे. क्षेत्र में नैपियर घास की बोआई की गई है।
नैपियर घास की विशेषताओं की बात की जाय तो यह पौष्टिक एवं सूपाच्य होने के साथ-साथ बहुवर्षीय हरा चारा है। इसे एक बार बोने पर पांच वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। प्रथम कटिंग बाआई के मात्र दो माह बाद, तद्पश्चात हर 02 माह में कटिंग ली जा सकती है। नैपियर घास में क्रूड प्रोटीन 10-12 प्रतिशत तक पायी जाती है। रख-रखाव में आसान तथा कम लागत में तैयार होने के कारण यह चारा सभी वर्ग के पशुपालकों के लिए वरदान है। संकर नैपियर से 4 कटिंग में 1500-1700 कु. प्रति हे. प्रति कटाई हरा-चारा प्राप्त किया जा सकता है। नैपियर घास का कुल उत्पादन लगभग 6000-7000 कु. प्रति हे. प्रति वर्ष (30000-35000 कु. प्रति हे. 05 वर्ष में) जो की अन्य मौसमी चारा फसलों के मुकाबले 03 गुना ज्यादा उत्पादन होता है। जिसके फलस्वरूप चारे में होने वाले कुल खर्च (5 वर्ष) में लगभग 3-4 लाख रू. प्रति हे. की बचत होगी।
उल्लेखनीय है कि जनपद में नैपियर घास क्षेत्र विस्तार के तहत विकास खण्ड कैसरगंज के ग्राम पंचायत कसेहरी बुज़ुर्ग में डीएम डॉ. दिनेश चन्द्र द्वारा 04 अगस्त को 30 बीघा क्षेत्रफल में नैपियर घास बुआई की गई थी। इस सम्बन्ध में डीएम द्वारा बीडीओ कैसरगंज को निर्देश दिया गया कि उक्त बुआई में सर्वाइव न कर पाये पौधों को हटा कर उनके स्थान पर नये बीजों का रोपण करा दिया जाय। डीएम के निर्देश पर बीडीओ कैसरगंज अजीत कुमार सिंह द्वारा सचिव गुलाब सिंह, ग्राम प्रधान तथा अन्य ग्रामवासियों के साथ उक्त खेत में नैपियर घास के पौधों की बुआई की गई।

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