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ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर “रन फॉर यूनिटी” और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन

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ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती पर “रन फॉर यूनिटी” और विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन

लखनऊ:  ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में आज लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में भूगोल विभाग द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सरदार पटेल के आदर्शों को समर्पित रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मंजुल त्रिवेदी ने अपने प्रेरणादायक विचारों से विद्यार्थियों को सरदार पटेल के जीवन, उनके समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से अवगत कराया। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प और संगठन कौशल से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

इस अवसर पर ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें अर्थशास्त्र विभाग के विषय प्रभारी डॉ. राहुल कुमार मिश्रा ने “विकसित भारत 2047 एवं विकसित उत्तर प्रदेश 2047” पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. मिश्रा ने बताया कि भारत को उच्च आय वर्ग वाले देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए 7.5% वार्षिक वृद्धि दर बनाए रखनी होगी तथा प्रति व्यक्ति आय को 14,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुँचाना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए जो रोडमैप प्रस्तुत किया गया है, उसके अंतर्गत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मैक्सिमम गवर्नेंस, डिजिटल गवर्नेंस, सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और निवेश आकर्षित करने जैसे बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विचार गोष्ठी में प्रो. सैयद हैदर अली ने अपने वक्तव्य में कहा कि “सरकार द्वारा लागू की गई नई शिक्षा नीति (NEP) ने शिक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है।” उन्होंने कहा कि यह नीति न केवल शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और कौशल आधारित बना रही है, बल्कि यह युवाओं को आत्मनिर्भर और नवाचारोन्मुख बना रही है। प्रो. अली ने यह भी कहा कि शिक्षा में इस परिवर्तन का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है — क्योंकि गुणवत्तापूर्ण और कौशल आधारित शिक्षा से प्रशिक्षित मानव संसाधन राष्ट्र की उत्पादकता और नवाचार क्षमता को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नई शिक्षा नीति ने स्थानीय भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान और डिजिटल साक्षरता को प्रोत्साहित कर एक संतुलित और आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी है।

इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “सरदार पटेल का सबसे बड़ा योगदान हमारे देश की राजनीतिक एकता है। आज हम जिस एकजुट भारत में रहते हैं, वह उनके कठिन परिश्रम और अदम्य इच्छाशक्ति का परिणाम है। उन्होंने आज़ादी के बाद 562 रियासतों को भारत संघ में मिलाकर एक भारत का निर्माण किया। इसीलिए उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है।” कुलपति महोदय ने सभी को सरदार पटेल के विचारों को आत्मसात करने और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता बनाए रखने की शपथ भी दिलाई।
कार्यक्रम का संचालन भूगोल विभाग की सहायक आचार्य डॉ. चेतना शर्मा एवं डॉ. प्रिया देवी द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नलिनी मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर ‘रन फॉर यूनिटी’ (एकता दौड़) का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अतिथियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही विश्वविद्यालय की एक विशेष टीम — जिसमें 50 विद्यार्थी एवं 4 संकाय सदस्य — डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. कौशलेश साह, डॉ. शारिक जी एवं डॉ. शन-ए-फातिमा — ने राजभवन, लखनऊ में प्रातः 7:00 बजे आयोजित एकता दौड़ (Unity Run) में सहभागिता की। इस दौड़ में विश्वविद्यालय के 50 छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लेकर सरदार पटेल के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को साकार किया।
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