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स्पेशल ट्रेनों में 6 हजार Voters भेजे गए!

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स्पेशल ट्रेनों में 6 हजार Voters भेजे गए!

इंडिया Live: राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने हाल ही में एक बड़ा सवाल उठाकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उनका आरोप है कि हरियाणा से बिहार के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, और यह सब कुछ बिहार चुनाव से ठीक पहले हुआ। सिब्बल ने कहा कि यह ट्रेनें किसलिए चलाई गईं — क्या यह सच में यात्रियों और वोटरों के लिए थीं या किसी प्लान किए गए ऑपरेशन का हिस्सा थीं? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग सच में वोट डालने जा रहे थे, तो उन्हें स्पेशल ट्रेन की क्या ज़रूरत थी? असली वोटर तो अपने खर्चे पर, अपने हिसाब से जाता है। उन्होंने बताया कि!

3 नवंबर 2025 को हरियाणा के करनाल और गुरुग्राम से चार ट्रेनें बिहार के लिए रवाना हुईं — सुबह 10 बजे करनाल से बरौनी के लिए, 11 बजे भागलपुर के लिए, और दो ट्रेनें दोपहर 3 और 4 बजे गुरुग्राम से भागलपुर के लिए गईं। सिब्बल का कहना है कि इन चार ट्रेनों में करीब छह हज़ार लोग सवार थे। उन्होंने पूछा कि आखिर इन ट्रेनों की टिकट बुकिंग किसने कराई और किराया किसने दिया? सिब्बल ने यह भी आरोप लगाया कि रेलवे के कुछ अधिकारियों को हरियाणा के बीजेपी नेताओं के कहने पर ट्रेनें चलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अगर यह सच है तो यह बहुत गंभीर बात है क्योंकि यह चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। सिब्बल ने चुनाव आयोग और रेलवे मंत्रालय से इस पर जवाब माँगा और कहा कि पारदर्शिता बहुत ज़रूरी है, ताकि जनता को यह पता चल सके कि आखिर इन ट्रेनों का मकसद क्या था।

रेल मंत्रालय ने तुरंत जवाब देते हुए कपिल सिब्बल के आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया। मंत्रालय ने कहा कि ये ट्रेनें चुनाव से जुड़ी नहीं थीं, बल्कि त्योहारों, खासकर *छठ पूजा* के मौके पर यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई गई थीं। रेलवे ने बताया कि हर साल छठ पूजा के दौरान बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले लोगों की संख्या लाखों में होती है, इसलिए हर बार “स्पेशल फेस्टिवल ट्रेनें” चलाई जाती हैं। इस साल भी पूरे देश में करीब 12 हज़ार स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिनमें से कई ट्रेनें उत्तर भारत से बिहार जाने वाली थीं। मंत्रालय ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि हर साल ऐसा किया जाता है ताकि प्रवासी मज़दूर और यात्री आराम से अपने घर पहुंच सकें। रेलवे ने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल ने इन ट्रेनों के लिए बुकिंग नहीं कराई और न ही किसी नेता का इसमें हाथ है।

इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया। विपक्षी नेताओं ने कहा कि रेलवे को यह साफ़ बताना चाहिए कि आखिर इतनी ट्रेनें चुनाव के समय क्यों चलाई गईं। वहीं बीजेपी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि कपिल सिब्बल सिर्फ़ मीडिया की सुर्खियाँ पाने के लिए बिना सबूत के आरोप लगा रहे हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिब्बल का मक़सद यह सवाल उठाना था कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कहीं चुनावी फायदे के लिए तो नहीं किया जा रहा। लेकिन रेलवे का दावा है कि यह सब त्योहारी भीड़ को संभालने की सामान्य प्रक्रिया थी, जिसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं।

सोशल मीडिया पर भी इस मसले पर लोगों की राय बँटी हुई है। कुछ लोगों का कहना है कि छठ पूजा के दौरान बिहार जाने वालों की भीड़ बहुत ज़्यादा होती है, इसलिए रेलवे का फैसला सही है। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में ट्रेनें चलाना वाकई शक पैदा करता है और इसकी जांच होनी चाहिए। इस पूरे विवाद के बीच अब सबकी नज़रें चुनाव आयोग और रेलवे मंत्रालय पर हैं कि क्या वे इस मामले की जांच करेंगे या इसे केवल राजनीतिक बयानबाज़ी मानकर छोड़ देंगे।

कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ ट्रेनों का नहीं है, बल्कि यह चुनाव की *ईमानदारी, पारदर्शिता और जनता के भरोसे* से जुड़ा है। अगर सच में ये ट्रेनें त्योहारों के लिए चलाई गईं, तो यह सामान्य बात है और सरकार का क़दम सही कहा जा सकता है। लेकिन अगर इनमें किसी राजनीतिक मकसद की बू है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर मुद्दा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, रेलवे मंत्रालय या अन्य एजेंसियाँ इस पर क्या रुख अपनाती हैं। फिलहाल इतना तय है कि कपिल सिब्बल के इस बयान ने चुनावी मौसम में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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