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बकरीद से पहले बंगाल में बड़ा फैसला!

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बकरीद से पहले बंगाल में बड़ा फैसला!

KOLKATA LIVE:पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की सरकार ने बकरीद 2026 से पहले पशु वध को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब बिना “फिटनेस सर्टिफिकेट” किसी भी मवेशी या भैंस का वध नहीं किया जा सकेगा। यह फैसला Bengal Animal Slaughter Control Act 1950 के तहत लागू किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कदम कानून व्यवस्था बनाए रखने और अवैध पशु वध पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस फैसले के बाद पूरे पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे कानूनी और प्रशासनिक सुधार बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे धार्मिक मामलों में दखल और राजनीतिक एजेंडा करार दे रहा है।

राज्य सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी पशु के वध से पहले अधिकृत अधिकारी से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। यानी अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस पशु का वध किया जा रहा है, वह कानूनी मानकों के अनुसार अनुमति योग्य है या नहीं। सरकार ने इस फैसले के पीछे कलकत्ता हाई कोर्ट के पुराने आदेश का भी हवाला दिया है। प्रशासन का दावा है कि हाई कोर्ट ने पहले भी कानून के सख्त पालन और अवैध पशु वध पर रोक लगाने की जरूरत बताई थी। इसी के आधार पर अब राज्यभर में निगरानी बढ़ाने और अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

बकरीद से ठीक पहले आए इस फैसले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि कानून का पालन हर हाल में होना चाहिए और अवैध गतिविधियों पर रोक जरूरी है। वहीं दूसरा पक्ष इसे त्योहार से पहले लिया गया संवेदनशील फैसला बता रहा है। कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी सरकार का कहना है कि यह फैसला किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पशु संरक्षण के लिए लिया गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद यह फैसला सरकार की नई प्रशासनिक नीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार लगातार कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती पर जोर देती दिखाई दे रही है। ऐसे में बकरीद से पहले आया यह आदेश आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। फिलहाल पूरे राज्य में प्रशासन अलर्ट मोड पर है और सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस फैसले का राजनीतिक और सामाजिक असर आने वाले दिनों में कितना बड़ा होता है।

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