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लखनऊ की पुरानी गलियों में क्लॉड मार्टिन और जॉन कॉलिन्स की भावुक ऐतिहासिक कहानी

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लखनऊ की पुरानी गलियों में क्लॉड मार्टिन और जॉन कॉलिन्स की भावुक ऐतिहासिक कहानी

LUCKNOW LIVE: लखनऊ की पुरानी गलियों में जब लोग इतिहास की बातें करते हैं तो एक बहुत ही दिलचस्प और भावुक सा किस्सा सामने आता है, जो समय के साथ लोगों की यादों और जुबान से जुड़ता चला गया।

 उस दौर में लखनऊ सिर्फ एक शहर नहीं था, बल्कि तहज़ीब, अपनापन और अलग-अलग संस्कृतियों के मेल का एक बड़ा केंद्र था।

सबसे पहले बात होती है एक बहुत ही प्रभावशाली अंग्रेज अफसर की — जनरल क्लॉड मार्टिन की। कहा जाता है कि वह लखनऊ में लंबे समय तक रहा और यहाँ की ज़िंदगी से गहराई से जुड़ गया था। उसने एक भारतीय बच्ची को गोद लिया था और उसे अपनी बेटी की तरह पाला। उसे अच्छी शिक्षा दी, बेहतर जीवन दिया और उसे समाज में एक पहचान दिलाई। लोग आज भी इस बात को उसके अपनापन और इंसानियत की मिसाल के रूप में याद करते हैं

इसके बाद ज़िक्र आता है एक दूसरे अंग्रेज अफसर का — जॉन कॉलिन्स का, जिसे लोग धीरे-धीरे “कल्लन” कहने लगे थे। कहा जाता है कि उसकी शादी हुई थी और वह अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता था। उसकी पत्नी उसके लिए पूरी दुनिया जैसी थी। लेकिन अचानक उसकी पत्नी का निधन हो गया, जिसके बाद उसकी ज़िंदगी बदल गई। वह अकेला रहने लगा, चुप रहने लगा और हमेशा अपनी पत्नी की यादों में खोया रहता था।

कहा जाता है कि वह अपनी पत्नी की याद को अपने पास हमेशा ज़िंदा रखना चाहता था, इसलिए उसने उसकी एक निशानी अपने पास रख ली थी। कुछ लोग बताते हैं कि वह बालों की एक लट थी, जिसे उसने धागे में बांधकर अपने गले में पहन लिया था। यह उसके लिए सिर्फ एक चीज नहीं थी, बल्कि उसकी मोहब्बत, दर्द और यादों का प्रतीक बन गई थी।

समय के साथ इसी अफसर की याद से एक जगह का नाम लोगों की जुबान पर “कल्लन की लाट” के रूप में आने लगा। कुछ लोग इसे उसकी स्मृति से जोड़ते हैं, कुछ इसे सिर्फ एक ऐतिहासिक निशानी मानते हैं, जबकि कुछ इसे लोगों की बनाई हुई लोक-याद भी कहते हैं।

धीरे-धीरे क्लॉड मार्टिन की गोद ली हुई बच्ची की कहानी और जॉन कॉलिन्स के जीवन का यह भावनात्मक किस्सा लोगों की जुबान पर ऐसे जुड़ते चले गए कि दोनों बातें मिलकर लखनऊ की पुरानी यादों का हिस्सा बन गईं। एक तरफ अपनापन और परवरिश की कहानी, और दूसरी तरफ प्यार और बिछड़ने का दर्द — दोनों ने मिलकर उस दौर की जिंदगी को समझने का एक अलग नजरिया दिया।

आज भी लखनऊ की पुरानी तहज़ीब में यह किस्सा लोगों के बीच सुनाया जाता है, जैसे इतिहास की कोई धुंधली सी याद हो, जो पूरी तरह साफ नहीं है लेकिन दिल को छू जाती है।

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