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पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों ने गाय की कुर्बानी से बनाई दूरी, हिंदू पशु व्यापारियों की रोजी-रोटी पर असर

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पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों ने गाय की कुर्बानी से बनाई दूरी, हिंदू पशु व्यापारियों की रोजी-रोटी पर असर।

कोलकाता Live: पश्चिम बंगाल में इस बार बकरीद से पहले पशु बाजारों की तस्वीर कुछ बदली-बदली नजर आ रही है। कई इलाकों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गाय की कुर्बानी के बजाय बकरों और अन्य वैकल्पिक पशुओं की खरीदारी को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

इसका सीधा असर उन हिंदू पशु व्यापारियों पर पड़ा है, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा त्योहारों के दौरान होने वाले पशु कारोबार पर निर्भर रहता था।

राज्य के कई पशु बाजारों में व्यापारियों का कहना है कि पहले बकरीद के मौके पर गायों की खरीद-बिक्री काफी अधिक होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें

लगातार गिरावट आई है। व्यापारियों के मुताबिक कानूनी सख्ती, सामाजिक तनाव और बदलते माहौल के कारण लोगों ने गाय खरीदने से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

हिंदू पशु कारोबारियों का कहना है कि वे वर्षों से इस व्यापार से जुड़े हैं और त्योहारों के दौरान होने वाली बिक्री से ही उनके परिवार का खर्च चलता है। इस बार मांग कम होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई व्यापारियों ने कहा कि बाजार में पहले जैसी रौनक नहीं दिख रही और पशुओं की बिक्री आधी से भी कम रह गई है।

पश्चिम बंगाल में बकरीद पर गोवंश की कुर्बानी से मुस्लिम समुदाय के स्वैच्छिक परहेज और राज्य सरकार द्वारा पशु वध को लेकर लागू किए गए सख्त नियमों (जैसे- फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य करना) के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशु व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। इसके मुख्य प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  • व्यापारियों की आजीविका पर संकट: त्योहारों के मौसम में गायों की अच्छी कीमत (₹25,000 से लेकर ₹1 लाख तक) मिलने की उम्मीद में मवेशी पालने और बेचने वाले हिंदू पशु व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
  • न बिकने वाले मवेशियों का पालन: खरीदार न मिलने से पशु व्यापारियों के सामने गायों को घर वापस ले जाने की मजबूरी खड़ी हो गई है। घर पर एक गाय को खिलाने का रोजाना का खर्च ₹400-₹500 तक आता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।
  • हाईकोर्ट का दखल: राज्य सरकार के नए नियमों के तहत बिना चिकित्सा प्रमाण पत्र के 14 साल से कम उम्र के मवेशियों की कुर्बानी पर रोक लगा दी गई है। इस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रोक लगाने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि ईद पर नियमों का सख्ती से पालन करना होगा और गोहत्या इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
  • धार्मिक और सामाजिक अपील: कई इलाकों में मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं द्वारा हिंदुओं की आस्था का सम्मान करने और गाय के बजाय बकरे या अन्य विकल्पों से कुर्बानी करने की अपील की गई है, जिसके चलते बाजारों में गायों की मांग में भारी गिरावट आई है।

 

 

 

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