
ईद-ए-ग़दीर: क्या है इसका महत्व? | पूरी कहानी
ईद-ए-ग़दीर (Eid al-Ghadir) इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना की याद में मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से शिया मुसलमानों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह पर्व 18 ज़िलहिज्जा को मनाया जाता है और ग़दीर-ए-खुम की घटना की याद दिलाता है।
ग़दीर-ए-खुम क्या था?
632 ईस्वी में हज से लौटते समय पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब ने मक्का और मदीना के बीच स्थित ग़दीर-ए-खुम नाम के मैदान में हुज़ूर मुहम्मद (स.) ने मोला अली(A,S) के हाथ को उठाकर कहा था कि जिसका मैं मौला उसका अली (A.S ) मौला स्थान पर एक बड़ा संबोधन दिया। शिया परंपरा के अनुसार, इसी अवसर पर उन्होंने हज़रत अली इब्न अबी तालिब को अपना उत्तराधिकारी और उम्मत का नेता घोषित किया।

“जिसका मैं मौला हूँ, अली भी उसके मौला हैं।”
शिया और सुन्नी दृष्टिकोण
- शिया मुसलमान इस घटना को हज़रत अली की आध्यात्मिक और धार्मिक नेतृत्व की घोषणा मानते हैं और इसी कारण ईद-ए-ग़दीर को सबसे बड़े त्योहारों में से एक मानते हैं।
- सुन्नी मुसलमान ग़दीर-ए-खुम की घटना को ऐतिहासिक रूप से स्वीकार करते हैं, लेकिन अधिकांश सुन्नी विद्वान इसे उत्तराधिकार की औपचारिक घोषणा के बजाय हज़रत अली के सम्मान और महत्व को दर्शाने वाला संबोधन मानते हैं।
ईद-ए-ग़दीर कैसे मनाई जाती है?
दुनिया भर में करोड़ों शिया मुसलमान इस दिन:
- शियों की मस्जिदों में महफ़िल होती है
- शियो की मस्जिदें सजाई जाती हैं
- शिया लोग नये कपडे पहनते हैं
- इबादत और दुआ करते हैं।
- शियो के घर में बढ़िया बढ़िया खाने बनते है
- एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं।
- गरीबों में खाना और दान वितरित करते हैं।
- घरों और इमामबाड़ों को सजाते हैं।
- विशेष मजलिसों और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
- ईद-ए-ग़दीर का संदेश
- ईद-ए-ग़दीर केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व, न्याय, वफादारी, भाईचारे और मानवता के मूल्यों का संदेश भी देती है। शिया परंपरा में इसे विलायत (आध्यात्मिक नेतृत्व) के ऐलान का दिन माना जाता है।
- निष्कर्ष
- ईद-ए-ग़दीर इस्लामी इतिहास के सबसे चर्चित और महत्वपूर्ण अवसरों में से एक है। यह दिन हज़रत अली के प्रति सम्मान, प्रेम और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है तथा दुनिया भर के शिया मुसलमान इसे खुशी, इबादत और भाईचारे के साथ मनाते हैं।
- ईद-ए-ग़दीर मुबारक!
“मोहब्बत, इंसाफ़ और इंसानियत का पैग़ाम ही ग़दीर का असली संदेश है।”