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मस्जिदों के दरवाजे सबके लिए खोलो: Najeeb Jung

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मस्जिदों के दरवाजे सबके लिए खोलो: Najeeb Jung

INDIA LIVE: नई दिल्ली से एक अहम बयान सामने आया है, जहां दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल Najeeb Jung ने मस्जिदों और जुमे की नमाज को लेकर मुस्लिम समाज को सलाह देते हुए आपसी भाईचारे, संवाद और सामाजिक सौहार्द बढ़ाने पर जोर दिया। नागरिक संगठन ‘सिटिज़न्स फॉर फ्रेटरनिटी भारत’ के एक सम्मेलन में बोलते हुए नजीब जंग ने कहा कि मस्जिदों को लेकर लोगों के मन में जो दूरी या संकोच है, उसे खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मस्जिद भी मंदिर, चर्च और गुरुद्वारे की तरह एक इबादतगाह है और लोगों को इसमें प्रवेश करने से डरना नहीं चाहिए।

जंग ने सुझाव दिया कि मुस्लिम समाज को इफ्तार जैसे आयोजनों में अन्य समुदायों के लोगों को भी आमंत्रित करना चाहिए ताकि आपसी समझ और विश्वास मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि जिस तरह सिख समुदाय ने अपने गुरुद्वारों के दरवाजे सभी के लिए खुले रखे हैं, उसी तरह मस्जिदों को लेकर भी सकारात्मक माहौल बनाया जाना चाहिए। जुमे की नमाज को लेकर चलने वाले विवादों पर अपनी राय रखते हुए नजीब जंग ने कहा कि शुक्रवार की नमाज में सामान्यतः लगभग 20 मिनट का समय लगता है, लेकिन यदि इससे किसी अन्य व्यक्ति या समुदाय को असुविधा होती है तो नमाज के समय में आवश्यकतानुसार बदलाव या अलग-अलग शिफ्ट में नमाज पढ़ने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के समायोजन पर धार्मिक रूप से कोई रोक नहीं है और अनावश्यक टकराव से बचना चाहिए। जंग ने यह भी कहा कि भारत में बढ़ते ध्रुवीकरण और समुदायों के बीच अविश्वास को कम करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, मुसलमानों को असुरक्षा की भावना से बाहर निकलना चाहिए और यह नहीं मानना चाहिए कि किसी के घर में देवी-देवताओं की तस्वीर होने से देश का चरित्र बदल जाता है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों को एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। सम्मेलन में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी धार्मिक आयोजनों के दौरान संवेदनशीलता और सहिष्णुता की आवश्यकता पर बल दिया।

नजीब जंग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज, धार्मिक जुलूसों और सामुदायिक आयोजनों को लेकर बहस जारी है। उनके बयान का मूल संदेश यही रहा कि मस्जिदों को लेकर भ्रांतियां दूर की जाएं, जुमे की नमाज को लेकर टकराव की स्थिति से बचा जाए और सभी समुदाय मिलकर भाईचारे तथा सामाजिक सद्भाव को मजबूत करें।

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