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भगवान परशुराम की जन्मस्थली को मिली नई पहचान, जलालाबाद अब होगा ‘परशुरामपुरी’ : मंत्री श्री ए.के. शर्मा

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भगवान परशुराम की जन्मस्थली को मिली नई पहचान, जलालाबाद अब होगा ‘परशुरामपुरी’ : मंत्री श्री ए.के. शर्मा

 

HIGHLIGHTS

मंत्रीपरिषद के ऐतिहासिक निर्णय का नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने किया स्वागत

जनभावनाओं के अनुरूप परशुरामपुरी नामकरण से सांस्कृतिक विरासत को मिला सम्मान

मा. मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक निर्णय, भगवान परशुराम की जन्मस्थली को मिला गौरव : ए.के. शर्मा

लखनऊ,6 जुलाई 2026: नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री श्री ए.के. शर्मा ने जनपद शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्रान्तर्गत कस्बा/नगर जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर “परशुरामपुरी” किए जाने संबंधी मंत्रीपरिषद के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय बताया है।

उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी एवं मंत्रीपरिषद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश की जनता की भावनाओं, जनप्रतिनिधियों की मांग तथा हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप है। इससे भगवान परशुराम से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को नई पहचान मिलेगी।श्री शर्मा ने कहा कि यह सर्वविदित है कि शाहजहांपुर स्थित भगवान परशुराम की जन्मस्थली तथा महर्षि जमदग्नि की तपोस्थली का नाम मुगल शासनकाल में जलालाबाद कर दिया गया था। लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों की यह मांग रही कि इस पवित्र स्थल का नाम भगवान परशुराम के नाम पर “परशुरामपुरी” रखा जाए। अब मंत्रीपरिषद के निर्णय से करोड़ों श्रद्धालुओं एवं प्रदेशवासियों की भावना का सम्मान हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि नगर विकास विभाग के प्रस्ताव पर भारत सरकार द्वारा अनापत्ति प्रदान किए जाने तथा माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रीपरिषद द्वारा इसे स्वीकृति दिए जाने से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक मजबूती मिलेगी। यह निर्णय हमारी प्राचीन परंपराओं, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक है।मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निरंतर ऐसे निर्णय ले रही है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्थलों और जनभावनाओं को सम्मान देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रही है।

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