
ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए वेदांता का बड़ा संकल्प, 5 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन लक्ष्य दोहराया।
नई दिल्ली/ लखनऊ 15 जुलाई 2026 – वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस (Global Energy Independence Day) के अवसर पर वेदांता ने देश में तेल और गैस की खोज तथा उत्पादन को तेज करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कंपनी ने कहा कि भारत के पास अपने विशाल हाइड्रोकार्बन संसाधनों का उपयोग कर आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने का बड़ा अवसर है। साथ ही, वेदांता ऑयल एंड गैस (BSE: 544782 | NSE: VOGL) ने प्रतिदिन 5 लाख बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (boepd) उत्पादन के अपने लक्ष्य को भी दोहराया।
वेदांता का कहना है कि दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऊर्जा बाजारों में शामिल होने के बावजूद भारत अपनी तेल और गैस की लगभग 90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है। इससे देश वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। कंपनी के अनुसार भारत में लगभग 300 बिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट हाइड्रोकार्बन संसाधनों की संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका दोहन तेज खोज अभियान और आधुनिक तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाकर किया जा सकता है।
कंपनी का मानना है कि घरेलू ऊर्जा संसाधनों में निरंतर निवेश से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार पैदा होंगे और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा, “ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत के लिए केवल ऊर्जा का नहीं, बल्कि रणनीतिक आर्थिक महत्व का विषय है। देश में उत्पादित तेल और गैस का हर बैरल हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, आयात पर निर्भरता घटाता है और राष्ट्रीय क्षमता को बढ़ाता है। भारत के पास प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, विश्वस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता और उद्यमशीलता की क्षमता है। दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत तेल एवं गैस पेशेवर भारतीय हैं। यदि हम अपने हाइड्रोकार्बन संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ दोहन करें, तो ऊर्जा आत्मनिर्भरता आर्थिक विकास, रोजगार और विकसित भारत का मजबूत आधार बन सकती है।”
कंपनी के अनुसार भारत में अभी भी हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। कई संभावित अवसादी बेसिनों (Sedimentary Basins) की अभी व्यवस्थित तरीके से खोज नहीं हुई है, जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश है।
वेदांता ने यह भी कहा कि भारत सरकार ने प्रधानमंत्री के नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन (समुद्र मंथन) के विजन के अनुरूप गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में पहले प्रतिबंधित रहे कई क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोल दिया है। साथ ही, इस दशक के अंत तक ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 500 अरब डॉलर के निवेश की संभावनाएं भी हैं।
कंपनी का मानना है कि दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उद्योग, उद्यमियों और तकनीकी नवाचार से जुड़े संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक होगी।
वेदांता ने कहा कि उसके चेयरमैन अनिल अग्रवाल लंबे समय से “जमीन के नीचे हरित क्रांति” (Green Revolution Below the Ground) की अवधारणा का समर्थन करते रहे हैं। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से दोहन करते हुए रोजगार बढ़ाना, घरेलू विनिर्माण को मजबूती देना और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना है। कंपनी का मानना है कि आज खोज गतिविधियों में तेजी लाने से न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य भी सृजित होगा।
वेदांता ऑयल एंड गैस ने देश के सबसे बड़े निजी अपस्ट्रीम पोर्टफोलियो में से एक विकसित किया है। कंपनी के पास राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में लगभग 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक हैं, जिनमें पारंपरिक और अपारंपरिक दोनों तरह के हाइड्रोकार्बन संसाधन शामिल हैं। भारत की अग्रणी निजी तेल एवं गैस उत्पादक कंपनी के रूप में वेदांता ऑयल एंड गैस जिम्मेदार परिचालन, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और टिकाऊ विकास के लिए प्रतिबद्ध है।