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सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे

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सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे

INDIA LIVE: गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को डिस्चार्ज हो गए। दोपहर 1:45 बजे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी।

मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा, “मैं देश को बताना चाहता हूं कि बापू का दिखाया रास्ता आज भी उतना ही सही और प्रासंगिक है, जितना 100 साल पहले था। शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण हमारी जीत हुई है। हिंसा होती तो मामला बिगड़ सकता था। इसलिए मैंने समय से पहले अनशन खत्म किया।”

वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों और NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे थे। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया था।

डिस्चार्ज होने के बाद वांगचुक की चार बातें…

1. गांधी जी का तरीका आज भी काम करता है

सोनम वांगचुक ने कहा- कई लोग कहते रहे कि ऐसे शासन में गांधी जी का रास्ता काम नहीं करेगा, लेकिन मेरी समझ है कि यह रास्ता सरकार से ज्यादा जनता के दिल तक पहुंचता है। सरकार हमारी बात सुने या न सुने, लेकिन जनता जरूर सुनती है। मैंने गांधी जी के इस प्रयोग को सफल होते देखा है। इससे पहले हमने लद्दाख में भी उनके बताए रास्ते पर चलकर आंदोलन किया था। अब मुझे महसूस हुआ कि यह पूरे देश के स्तर पर भी उतना ही प्रभावी है।

2. यह रास्ता कठोर दिल को भी पिघला सकता है

वांगचुक ने आगे कहा- मैं देशवासियों से कहना चाहता हूं कि बापू के दिखाए रास्ते पर चलें। इससे समाधान जरूर निकलता है। देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होता। जरूरी नहीं कि पहली बार में ही सफलता मिल जाए, लेकिन लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। हमें दूसरों को तकलीफ देने के बजाय खुद कठिनाइयों का सामना करना चाहिए। यही रास्ता सबसे कठोर दिल को भी पिघला सकता है।

3. हिंसा से मामला बिगड़ता, इसलिए आंदोलन रोका

उन्होंने कहा- मैं देश के युवाओं को बधाई देना चाहता हूं। उन सभी लोगों का भी धन्यवाद, जिन्होंने इस आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया। हमें समझना होगा कि अगर कोई समाधान निकला है तो वह हमारी ताकत, लाठी या पत्थर से नहीं, बल्कि शांति और संयम से निकला है। हमने खुद कष्ट सहा, इसलिए बात आगे बढ़ी। अगर हिंसा होती, तो मामला और बिगड़ सकता था। इसी वजह से मुझे शांतिपूर्ण आंदोलन को भी तय समय से पहले रोकना पड़ा।”

4. इस्तीफे के बाद उम्मीद है कि सुधार होगा

शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक ने कहा- मुझे पूरी उम्मीद है कि सिस्टम में सुधार होगा। यह सिर्फ एक शुरुआत है। संसद में बिल पर चर्चा हो रही है। इसके बाद जो भी सही हो, उस सिस्टम को अपनाया जाए। पूरी उम्मीद है कि सभी वादे निभाए जाएंगे। जिन्होंने शांति से प्रदर्शन किया, उन पर एक्शन नहीं होगा। जहां भी जनता सवाल करे, वहां के मंत्री और नेता को जवाब देना जरूरी है।

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