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यमन में फिर एयरस्ट्राइक! जेल पर हमला, 7 की मौत।

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यमन में फिर एयरस्ट्राइक! जेल पर हमला, 7 की मौत।

यमन में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। उत्तर यमन के अल-जौफ प्रांत के अल-हज्म शहर में एक जेल पर हुए कथित एयरस्ट्राइक ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। हूती अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है, जबकि कम से कम 7 लोग घायल हुए हैं। जिस जेल को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है, उसका नाम सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी बताया गया है। हमले के बाद जेल की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा और मलबे के बीच राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। हूती पक्ष का दावा है कि इस हमले के पीछे सऊदी अरब का हाथ है। हालांकि, यहां यह साफ करना जरूरी है कि सऊदी अरब की तरफ से इस आरोप की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे हूती पक्ष का आरोप ही माना जा रहा है।

रिपोर्टों के मुताबिक हमला सोमवार को अल-जौफ प्रांत की राजधानी अल-हज्म में हुआ। यह इलाका हूती समूह के नियंत्रण वाले उत्तरी यमन में आता है और रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो में इमारत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई देता है और मलबे में बचावकर्मी लोगों की तलाश करते नजर आते हैं। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि सात लोगों की मौत हुई है और सात अन्य घायल हुए हैं। मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल बताया गया है। जेल प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि मलबे के नीचे कई कैदी फंसे हो सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने आई एक महिला के मलबे में फंसे होने की बात कही गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस हमले के पीछे कौन है? हूती विद्रोहियों ने सीधे तौर पर सऊदी अरब पर आरोप लगाया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने इस हमले को सऊदी कार्रवाई बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हूती पक्ष का कहना है कि अल-जौफ में सऊदी हमलों के कारण स्थिति और खराब हो रही है। लेकिन दूसरी तरफ सऊदी अरब की ओर से इस खास जेल हमले पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हमले की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर साबित हो चुकी है। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

यमन का संकट कोई नया संकट नहीं है। यहां कई वर्षों से सत्ता और नियंत्रण को लेकर संघर्ष चल रहा है। साल 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को पीछे हटना पड़ा। साल 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने यमन की सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। इसके बाद हूती समूह और सऊदी समर्थित यमनी ताकतों के बीच संघर्ष लंबे समय तक चलता रहा। इस युद्ध ने यमन की आम जनता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और देश में मानवीय संकट गहराता गया।

कुछ समय तक यमन में अपेक्षाकृत शांति दिखाई दे रही थी। अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक युद्धविराम लागू हुआ था। बाद में इसका औपचारिक विस्तार नहीं हुआ, लेकिन जमीन पर एक तरह की नाजुक शांति बनी रही। अब हाल के दिनों में यह शांति कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। यमन के कई इलाकों में फिर से लड़ाई बढ़ रही है और अल-जौफ भी उन क्षेत्रों में शामिल है जहां तनाव बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में जेल पर हुआ यह हमला पहले से बिगड़ते हालात को और गंभीर बना सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा बड़ा पहलू सऊदी अरब और हूतियों के बीच बढ़ता टकराव है। ताजा घटनाओं में हूती समूह ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में भी हमलों का दावा किया है। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को अबहा, जिजान, नजरान और खमिस मुशैत जैसे इलाकों में हूती हमलों से 73 लोग घायल हुए। सऊदी पक्ष ने इन हमलों को खतरनाक बढ़ोतरी बताया है। यानी एक तरफ यमन के अंदर लड़ाई तेज हो रही है, तो दूसरी तरफ इसका असर सीधे सऊदी अरब तक दिखाई दे रहा है।

यही वजह है कि अल-जौफ जेल पर हुआ हमला सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं माना जा रहा है। अगर हूती पक्ष का आरोप सही साबित होता है तो यह घटना पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और ज्यादा गंभीर बना सकती है। दूसरी तरफ अगर आने वाले समय में सऊदी अरब की ओर से कोई जवाबी कार्रवाई होती है, तो संघर्ष का दायरा और बढ़ने की आशंका रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता आम लोगों की सुरक्षा को लेकर है, क्योंकि युद्ध का सबसे ज्यादा असर उन्हीं लोगों पर पड़ता है जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं।

जेल पर हमले की खबर ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई है क्योंकि जेल एक ऐसी जगह होती है जहां बड़ी संख्या में लोग पहले से ही बंद होते हैं और किसी भी हमले की स्थिति में उनके लिए बाहर निकलना आसान नहीं होता। इस मामले में भी मलबे में लोगों के फंसे होने की खबर सामने आई है। राहत और बचाव दलों ने घटनास्थल पर काम किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। अभी यह भी साफ नहीं है कि मलबे के नीचे फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है या नहीं। इसलिए मृतकों की संख्या आगे बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

यमन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ सकती है। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। अगर फिर से बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो इसका असर केवल यमन तक सीमित नहीं रह सकता। लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि यमन में होने वाली हर बड़ी सैन्य कार्रवाई पर दुनिया की नजर रहती है।

फिलहाल इस पूरी घटना में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण हैं। पहली, अल-जौफ के अल-हज्म शहर की जेल पर हमला हुआ है और हूती पक्ष के मुताबिक इसमें सात लोगों की मौत हुई है। दूसरी, मृतकों में एक बच्चा भी शामिल बताया गया है और कम से कम सात लोग घायल हुए हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हूतियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार बताया है, लेकिन सऊदी अरब की तरफ से इस खास आरोप पर तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए खबर को समझते समय आरोप और पुष्टि के बीच अंतर रखना बेहद जरूरी है।

अब आने वाले समय में सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सऊदी अरब इस आरोप पर क्या जवाब देता है और हूती समूह आगे क्या कदम उठाता है। अगर दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई बढ़ती है तो यमन में लंबे समय से बनी नाजुक स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल अल-जौफ की जेल पर हुआ हमला एक गंभीर चेतावनी की तरह देखा जा रहा है कि यमन में संघर्ष फिर से बड़े स्तर पर भड़क सकता है। सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि स्थिति और खराब होने से पहले तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयास किए जाएं, ताकि आम नागरिकों की जान और क्षेत्र की सुरक्षा को और नुकसान न पहुंचे।

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