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नेपाल में विनाशकारी बाढ़: भारत ने ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाते हुए भेजी 62 टन राहत सामग्री

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नेपाल में विनाशकारी बाढ़: भारत ने ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका निभाते हुए भेजी 62 टन राहत सामग्री

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र (रसुवा, भोटेकोशी व त्रिशूली नदी घाटी) में हिमनद/हिमस्खलन के कारण आई अचानक बाढ़ (Flash Flood) और भूस्खलन से नेपाल में भारी तबाही हुई है। इस मानवीय संकट की घड़ी में भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया है।

मुख्य बिंदु और भेजी गई सहायता का विवरण:

  • शीर्ष नेतृत्व का संपर्क: आपदा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से दूरभाष पर बात की और इस दुखद हादसे पर संवेदना व्यक्त करते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

  • 62 टन राहत सामग्री रवाना: भारतीय वायु सेना (IAF) के विशेष सैन्य परिवहन विमानों (C-130J सुपर हरक्यूलिस और C-17 ग्लोबमास्टर) के माध्यम से 3 किश्तों में अब तक 62 टन से अधिक HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) सामग्री काठमांडू भेजी जा चुकी है।

  • राहत सामग्री में शामिल मुख्य सामान:

    • अस्थायी टेंट/शेल्टर और तिरपाल

    • कंबल, सोलर लैंप और हाइजीन किट

    • जीवन रक्षक दवाएं, वाटर प्यूरीफिकेशन टेबलेट्स

    • खाद्य पैकेट और किचन सेट्स

    • डिवाटरिंग पंप और पोर्टेबल जनरेटर सेट

  • मेडिकल व टनल रेस्क्यू टीम: भारत ने केवल राहत सामग्री ही नहीं, बल्कि 11 सदस्यीय डॉक्टरों व पैरामेडिक्स की मेडिकल टीम और टनल रेस्क्यू (सुरंग बचाव) के लिए रेकी टीम भी भेजी है। इसके अतिरिक्त तुरंत कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए बेली ब्रिज (Bailey Bridges) प्रदान करने का भी प्रस्ताव दिया है।

  • भारतीय नागरिकों की सुरक्षा व कंट्रोल रूम: नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों व पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली, काठमांडू और बीजिंग में 24×7 हेल्पलाइन व कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं।

नेपाल में काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं और नेपाल सरकार की आवश्यकतानुसार आगे भी अतिरिक्त सहायता भेजने के लिए पूरी तैयारी रखी गई है।

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