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राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर!

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राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर!

INDIA LIVE: उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है।

राज्यसभा चुनाव भले ही संसद के ऊपरी सदन के लिए हो रहा हो, लेकिन इस चुनाव की टाइमिंग बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव होगा। यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव के बहाने अब विधायकों की संख्या, समर्थन और राजनीतिक समीकरणों पर भी नजरें टिक गई हैं।

मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन मजबूत स्थिति में है, जबकि समाजवादी पार्टी को कांग्रेस और दूसरे सहयोगी विधायकों के समर्थन के साथ अपने उम्मीदवारों के लिए वोट जुटाने हैं। एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है।

 

अब यहीं से शुरू होता है असली सियासी खेल।

क्योंकि राज्यसभा चुनाव में अगर मुकाबला तय संख्या से आगे जाता है, तो अतिरिक्त वोट बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

इसी वजह से भाजपा और समाजवादी पार्टी की नजर उन विधायकों पर भी बताई जा रही है, जिनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अपने-अपने दलों में चर्चा चल रही है।

खासकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कई मौजूदा विधायक अपने टिकट को लेकर चिंतित हो सकते हैं। हालांकि किसी विधायक को टिकट देने या क्रॉस वोटिंग के बदले टिकट का ऑफर दिए जाने की बात अभी सभी मामलों में आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और रिपोर्टों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

लेकिन इतना जरूर है कि राज्यसभा चुनाव ने 2027 की राजनीति की तैयारी को भी तेज कर दिया है।

समाजवादी पार्टी की बात करें तो पार्टी ने अपने दो उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं।

पार्टी ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवाणी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों उम्मीदवारों ने लखनऊ में नामांकन भी दाखिल कर दिया है। नामांकन के दौरान पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद रहे।

धनराज नाथवाणी के नाम ने खास तौर पर राजनीतिक चर्चा बढ़ाई है, क्योंकि वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी हैं और उनका राजनीतिक करियर पारंपरिक नेताओं से अलग रहा है।

दूसरी तरफ भाजपा ने अभी अपने सभी उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में भाजपा की अंतिम रणनीति पर भी सबकी नजर है।

अब सवाल यह है कि भाजपा के सामने चुनौती क्या है?

भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायक हैं। लेकिन अगर पार्टी अतिरिक्त सीटों पर दावा करती है, तो उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में छोटे दलों, सहयोगियों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

उधर समाजवादी पार्टी के सामने भी गणित बिल्कुल साफ है।

सपा अपने दो उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने की स्थिति में है। लेकिन अगर पार्टी तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। आज की तारीख में तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी की आधिकारिक घोषणा से ही साफ होगा।

यानी आने वाले दिनों में सिर्फ उम्मीदवारों के नाम ही महत्वपूर्ण नहीं होंगे, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कौन सा विधायक किस उम्मीदवार के समर्थन में खड़ा होता है।

राज्यसभा चुनाव में मतदान गुप्त मतदान जैसा नहीं होता। राजनीतिक दल अपने विधायकों को मतदान के संबंध में निर्देश देते हैं और दल के विधायकों की वोटिंग प्रक्रिया भी सामान्य चुनाव से अलग होती है। इसलिए क्रॉस वोटिंग की कोई भी स्थिति राजनीतिक रूप से काफी चर्चा का विषय बन सकती है।

और यही वजह है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह राज्यसभा चुनाव भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा बन गया है। एक तरफ भाजपा अपने मौजूदा संख्या बल और गठबंधन के सहारे अधिकतम सीटें हासिल करने की कोशिश करेगी।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपने समर्थक विधायकों को एकजुट रखने और अपने उम्मीदवारों के लिए जरूरी वोट सुरक्षित करने की कोशिश करेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह चुनाव सिर्फ संख्या के हिसाब से चलेगा, या फिर आखिरी समय में कोई ऐसा राजनीतिक समीकरण बनेगा, जिससे मुकाबला और रोचक हो जाए?

कौन से विधायक किसके साथ खड़े होते हैं? क्या किसी दल के अंदर नाराजगी सामने आती है? क्या छोटे दल और निर्दलीय विधायक किसी उम्मीदवार के लिए निर्णायक भूमिका निभाते हैं?

और सबसे बड़ी बात—क्या राज्यसभा चुनाव के ये समीकरण 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति की झलक भी दिखाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में धीरे-धीरे सामने आएंगे। फिलहाल उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होना है और नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।यानी चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सियासी गतिविधियां और तेज होना तय है। अब देखना यही होगा कि राज्यसभा की इन 10 सीटों का गणित किस तरह बदलता है और 2027 की बड़ी सियासी लड़ाई से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में कौन-कौन से नए समीकरण सामने आते हैं।

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