
अमेठी : जिले के मुसाफिरखाना विकास खण्ड अंतर्गत पूरे पंडा रंजीतपुर गांव बिगत कई सालों से दोहरे संकट से जूझ रहा है मगर जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं। एक ओर जहाँ आवारा मवेशी गाँव के किसानों के लिए आफत बन फसल चरने के साथ ही खेतों को रौंद कर बर्बाद कर रहे हैं। वहीं सालों से बंदरों के आतंक से इस गाँव के ग्रामीण परेशान हैं। बंदर सुबह व शाम लोगों के घरों में घुस जाता है और खाने-पीने के सामान को बिखरने के साथ-साथ कई बार बच्चों पर हमला भी कर देते हैं। हालात यह है कि लोग अब गांव में बंदरों और आवारा मवेशियों से बचाव के लिए नए-नए नुस्खे अपना रहे हैं। लेकिन दोनों से पार पाना उनके बस से बाहर है।
जिले के मुसाफिरखाना विकासखण्ड के रंजीतपुर गांव निवासी पँ नागेंद्र मिश्र, अशोक शर्मा, श्रीराम गुप्ता, सालिक राम आदि ने बताया कि गाँव में बंदरों और आवारा पशुओं का आतंक है। बंदर आये दिन किसी न किसी ग्रामीण को अपना शिकार बना रहे हैं। वहीं इस संबंध में शिकायत करने के बाद भी स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से बेपरवाह बना हुआ है। इससे गांव में लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है और बंदरों का आतंक दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। बंदर छत पर सूखते कपड़े फाड़ने व खाने-पीने की सामग्री हाथों से झपटकर ले जाते हैं। इन उत्पाती बंदरों ने गांव के दर्जनों लोगों को काटकर घायल कर चुके हैं। बंदर एक साथ झुंड में चलते हैं और जिस घर में घुसते हैं उसमें मोबाइल, बर्तन, कपड़ा सहित खेतों में फसलों को भी तहस नहस कर दे रहे हैं। वहीं इन ग्रामीणों ने बताया कि आवारा पशु गेहूं, मटर, आलू, सरसों की फसलों को तहस-नहस कर रहे हैं। इससे दिन-रात रखवाली करने वाले ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से बंदरो और आवारा पशुओं को लेकर पुख्ता उपाय किये जाने की मांग की है।