
जबकि यूपी में नेताओं पर दर्ज केस वापसी का ये कोई पहला मामला नहीं है
लखनऊ : यूपी में योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी बीजेपी नेताओं के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने का फैसला किया जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश की राजनीतिक माहौल गर्म सी हो गई जबकि यूपी में नेताओं पर दर्ज केस वापसी का ये कोई पहला मामला नहीं है। समाजवादी पार्टी की सरकार के वक्त भी ऐसा होता हुआ देखा गया है योगी सरकार ने 3 साल पहले ही साफ कर दिया था कि नेताओं पर दर्ज केस वापस लिए जाएंगे। राजनीतिक लोगों पर कई बार केस दर्ज हो जाते हैं, जिनका पता तब चलता है जब नोटिस आता है अब सरकार ने मुजफ्फरनगर केस में मंत्री सुरेश राणा, संगीत सोम के साथ कई अन्य नेताओं पर दर्ज मुकदमें वापस लेने का फैसला किया है और कोर्ट में अर्जी दे दी है। जबकि अभी आखिरी फैसला कोर्ट को बाकी है
भदौरिया ने दिया जवाब
सपा के प्रवक्ता डॉ अनुराग भदौरिया ने कहा कि मैं बीजेपी से जानना चाहता हूं कि क्या इसीलिए सरकार बनी थी कि मंत्रियों पर लगे मुकदमे वापस ले लिए जाएं? क्या इससे अपराधियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा? सरकार को आपराधिक मुकदमे वापस नहीं करने चाहिए समाजवादी पार्टी की सरकार में भी कई नेताओं पर दर्ज केस वापस लिए गए थे। सबसे ज्यादा राजनीतिक बवाल तब हुआ था, जब कचहरी में हुए सीरियल ब्लास्ट के आरोपियों पर दर्ज केस वापस लेने की अर्जी सपा सरकार ने दिया था। सपा सरकार में रविदास महरोत्रा, कैलाश चौरसिया, विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह, राममूर्ति वर्मा, सुरेन्द्र सिंह पटेल, भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित, विजय मिश्रा, हरिओम यादव समेत कई नेताओं पर दर्ज केस सरकार ने वापस लिए थे
बीजेपी से राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व डीजीपी बृजलाल ने भी दो दिन पहले एक ट्वीट के जरिए एसपी और बीएसपी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए लिखा था कि तारिक क़ासमी ‘हूजी’ आतंकवादी है, जिसे बाराबंकी से 2008 में मेरे निर्देशन में गिरफ़्तार किया गया था।