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प्रधानों के वित्तीय अधिकार समाप्त होते ही गौवंशों को चारे पानी की किल्लत

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पुरवा,उन्नाव  : प्रधानों के वित्तीय अधिकार समाप्त होते ही सबसे बड़ा संकट गौवंश पर है पिछले पांच माह से चारे दाने के नाम पर मिलने वाली धनराशि का भुगतान नहीं हुआ,दो राहे पर खड़ी गौवंशो की परवरिश कैसे होगी स्पष्ट जबाब किसी के पास नहीं है,इस सम्बंध में प्रधानों का कहना है कि धनाभाव के चलते वह जल्द ही गौशालयों की चाभी बीडीओ को सौंप देंगे,अन्ना मवेशियों से बरबाद होती फसलों को बचाने के लिए राज्य सरकार ने पशु आश्रय स्थलों का निर्माण कराया था,ब्लाक क्षेत्र में 22 पशु आश्रयस्थलों के संचालन की जानकारी दी गई है व संचालन प्रधानों के जिम्मे है,गौरतलब यह कि ज्यादातर पशु आश्रयस्थलों में पल रहे मवेशी राम भरोसे हैं,कहीं चारा नहीं तो कहीं केवल पैरा व घास फूस के सहारे जीवन कट रहा है हालाकिं प्रधानों की मानें तो गत पांच माह से चारे के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली अब जब पंचायतों को प्रसाशकों के हवाले कर दिया गया है संचालन हम प्रधानों से कराया जा रहा है महत्वपूर्ण यह कि गत पांच माह का पैसा नहीं मिला तो आगे का भुगतान कौन ,कैसे होगा स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।

उल्लेखनीय है कि पांच माह से जैसे तैसे चारे पानी का इंतजाम कर रहे प्रधानों की परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ रहीं है।ज्यादातर प्रधानों का कहना है कि यदि पशु आश्रयस्थलों के संचालन सम्बन्धी स्पष्ट आदेश के अभाव में जल्द ही चाभियाँ खण्ड विकास अधिकारी को सौंप देंगे।इस सम्बंध में एडीओ पंचायत शिवओम का कहना है कि यह सच है कि पांच माह से भुगतान नहीं हुआ आगे पशु आश्रयस्थलों का संचालन प्रधानों की तरह सचिव करेंगे।

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