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बेजुबानों के लिए मसीहा बने लखनऊ के चार नौजवान

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लखनऊ :   कहते हैं यदि आपके अंदर कुछ करने की इच्छा शक्ति हो तो मंजिल मिल ही जाती है। इसी सोच को जीवन का हिस्सा बना रहे राजधानी के चार नौजवानों ने बेसहारा बेजुबानों के लिए कुछ करने का न केवल संकल्प लिया, बल्कि उस रास्ते पर चल पड़े। बेसहारा मवेशियों की सुरक्षा के लिए वाहनों में लगने वाली पीली पट्टी का बेल्ट तैयार किया और फिर बेहसरा मवेशियों और श्वानों के गले में पहनान शुरू कर दिया। गणतंत्र दिवस से शुरू की इस नई पहल को देखकर आम लोगों ने भी इनका हौसला बढ़ाया है। सड़क पर आए दिन दुर्घटना में बेसहारा मवेशियों और श्वानों की जान जाती रहती है। मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करने वाले शांतनू नवंबर में कार से अपने घर लखनऊ आ रहे थे। रास्ते में कई बेसहारा अपनी जान गंवाए सड़क के किनारे पड़े नजर आए। उन्हें देखकर शांतनू ने बेसहारा बेजुबानों के लिए कुछ ऐसा करने की सोंची, जिससे इनकी जान बचाई जा सके। शांतनू को रात में वाहनों और सड़क के किनारे लगे रिफ्लेक्टर पट्टी को देखकर आइडिया आया और फिर लखनऊ आकर गोमतीनगर स्थित अपने घर पर उन्होंने तीन साथियों मनीष मिश्रा, अतुल तिवारी व हिमांशु रंजन के साथ बेजुबानों को बचाने पर मंथन किया।

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