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अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्ते अत्यन्त तनावपूर्ण

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अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्ते अत्यन्त तनावपूर्ण।

Indo US relation:हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती दोस्ती के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह बात तब सामने आई जब भारत और अमेरिका ने व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर गंभीर बातचीत शुरू की थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया और मीडिया इंटरव्यू में खुलकर कहा कि अगर भारत ने अमेरिका के साथ न्यायसंगत व्यापारिक समझौते पर सहमति नहीं बनाई, तो उन्हें कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भारत को अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देनी होगी, वरना दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका की यात्रा के दौरान “Mission 500” नामक महत्वाकांक्षी व्यापार योजना की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य 2030 तक भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। यह योजना दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था। हालांकि, ट्रंप का मानना है कि भारत अभी भी कई क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों को बराबर अवसर नहीं दे रहा है, और यह अमेरिका के लिए अस्वीकार्य है।

ट्रंप ने कहा कि “दोस्ती तभी काम करती है जब दोनों पक्ष समान रूप से लाभान्वित हों। अगर भारत अपनी नीतियों को नहीं बदलेगा, तो अमेरिका को भी अपनी नीति कड़ी करनी पड़ेगी।” उन्होंने यह भी इशारा किया कि यदि भारत ने अमेरिका के टेक्नोलॉजी, कृषि, और सेवा क्षेत्रों में ज्यादा दरवाज़े नहीं खोले, तो अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने का विकल्प खुलेगा।

भारत की ओर से कहा गया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापारिक फैसले करेगा और अमेरिका के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक बातचीत में लगा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी स्पष्ट किया है कि भारत और अमेरिका की दोस्ती केवल व्यापार से कहीं अधिक है, यह सामरिक, तकनीकी और कूटनीतिक साझेदारी भी है।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की चेतावनी 2024 के अमेरिकी चुनावों के मद्देनजर उनकी कूटनीतिक पोजीशन मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। वहीं, भारत दोनों पक्षों के हितों को संतुलित करते हुए एक बेहतर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि भारत-अमेरिका संबंधों में दोस्ती के बीच भी कठिनाइयाँ और समझौतों की जरूरत बनी हुई है, और दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा ताकि यह रिश्ता और मजबूत हो सके।

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