
दीन दयाल उपाध्याय संस्थान में ‘वंडर बॉक्स’ और ‘गुड गवर्नेंस’ पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, सुशासन और बाल शिक्षा पर हुए सारगर्भित विचार
दीन दयाल उपाध्याय संस्थान में ‘वंडर बॉक्स’ और ‘गुड गवर्नेंस’ पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित, सुशासन और बाल शिक्षा पर हुए सारगर्भित विचार
लखनऊ: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ में अधिकारियों, कर्मचारियों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित कर उन्हें अधिक दक्ष और सक्षम बनाने का क्रम जारी है। इसी कड़ी में संस्थान में 4-5 अगस्त को “वंडर बॉक्स आधारित क्षमता संवर्धन” और 5-7 अगस्त तक “गुड गवर्नेंस” विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू के संरक्षण और अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण श्रृंखला में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। मंगलवार को आयोजित सत्र में उमेश चंद्र जोशी, सलाहकार एवं राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर, भारत सरकार ने सुशासन के प्रमुख घटकों–सहभागिता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षण विधियों पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया।पूर्व लोक सेवा आयोग सदस्य एवं शिक्षाविद डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य ने ‘वंडर बॉक्स’ के माध्यम से बच्चों की सहज, सरल और वैज्ञानिक पद्धति से शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि 3 से 6 वर्ष की उम्र में बच्चों की सीखने की शक्ति अत्यंत तीव्र होती है, ऐसे में उन्हें जटिल विषयों से दूर रखकर सरल और ग्राह्य विषयों से परिचित कराना चाहिए।मानवोदय सेवा संस्थान के संस्थापक वरुण विद्यार्थी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बाल मानसिकता और माता-पिता की चुनौतियों पर विस्तार से बात की।समापन सत्र में महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने गुरुकुल परंपरा और प्राचीन भारतीय शिक्षण पद्धति की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि प्राचीन धार्मिक स्थलों से जुड़ी शिक्षण संस्थाएं छात्रों को शास्त्र और शस्त्र दोनों में दक्ष बनाती थीं।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन कुमार सिन्हा ने किया। उपनिदेशक डॉ. बी. एल. मौर्य ने सभी प्रतिभागियों, विशिष्ट अतिथियों और संस्थान के महानिदेशक को धन्यवाद ज्ञापित किया। आयोजन में सहायक निदेशक डॉ. राजकिशोर यादव, डॉ. वरुण चतुर्वेदी, डॉ. शिव बचन सिंह यादव, मोहित यादव, विनीता सिंह, उपेंद्र कुमार दूबे और मोहम्मद शहंशाह का योगदान उल्लेखनीय रहा।
