
राज्यसभा में प्रमोद तिवारी का हमला: अमेरिका का टैरिफ बढ़ाना अनुचित, पीएम मोदी की चुप्पी देश के गौरव पर सवाल

राज्यसभा में प्रमोद तिवारी का हमला: अमेरिका का टैरिफ बढ़ाना अनुचित, पीएम मोदी की चुप्पी देश के गौरव पर सवाल
लखनऊ: राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को अनुचित और अस्वीकार्य करार दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका के सामने राष्ट्रीय हितों पर लगातार चुप्पी का नतीजा है। प्रमोद तिवारी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका के सामने उनकी खामोशी से पूरे देश का गौरव धूमिल हो रहा है।प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रहित सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता का एजेंडा रहा है और उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आखिर वे अमेरिकी भयादोहन के सामने अपनी चुप्पी का राज क्यों नहीं बता पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के गौरवशाली अतीत को याद करना चाहिए और इंदिरा गांधी के उस दौर की नीति से प्रेरणा लेनी चाहिए जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति निकसन और विदेश मंत्री सिंगर को कड़े अंदाज में यह समझाया था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के लिए किसी की परवाह नहीं करता।उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे इंदिरा गांधी की समाधि स्थल पर जाकर प्रेरणा लें और देश के हित में एक मजबूत नीति के तहत अमेरिका को उचित जवाब दें। प्रमोद तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘नमस्ते ट्रंप’ के जरिए की गई गलती की कीमत देश को आज अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और आर्थिक नीति पर आ रही आंच से चुकानी पड़ रही है।विपक्ष के उपनेता ने यह भी कहा कि अमेरिका लगातार 33 बार सीजफायर तोड़ने और टैरिफ बढ़ाने जैसी कार्रवाई करके देश की प्रतिष्ठा पर हमला कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय हितों के परिप्रेक्ष्य में दृढ़ता दिखानी चाहिए। उन्होंने इस अनुचित व्यापार दबाव को मोदी सरकार में इच्छाशक्ति की कमी भी बताया।इसके अलावा, प्रमोद तिवारी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भी मोदी सरकार की आलोचना की और कहा कि सरकार संसद में इस पर चर्चा से कतरा रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनाव आयोग से 65 लाख कटे हुए वोटों के मामले में पूछताछ का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग को 32 लाख लोगों के पलायन का विवरण प्रस्तुत करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार पर संसद में चर्चा देश का संवैधानिक अधिकार है और निर्वाचन आयोग को लोगों के वोट के अधिकार से छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है।प्रमोद तिवारी ने निष्कर्ष निकाला कि मोदी सरकार वैदेशिक और आर्थिक मामलों में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हो चुकी है।