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भारत की अमेरिका को मात  अमेरिका के तेल को कहा ‘ना’!

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भारत की अमेरिका को मात  अमेरिका के तेल को कहा ‘ना’!

इंडिया Live:भारत ने हाल ही में अपनी तेल खरीद नीति में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अब अमेरिका से कच्चा तेल खरीदने की बजाय पश्चिम अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों से तेल आयात करने का निर्णय लिया है।

 

यह फैसला न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और व्यापारिक चतुराई को भी दर्शाता है।

अमेरिका से दूरी, अफ्रीका और मध्य पूर्व की ओर झुकाव

 

अब तक भारत अमेरिका से वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) ग्रेड का बड़ा हिस्सा मंगवाता था। लेकिन इस नई नीति के तहत IOC ने नाइजीरिया से अगबामी और उसान ग्रेड के कुल 20 लाख बैरल और अबू धाबी से दास क्रूड के 10 लाख बैरल तेल खरीदने का फैसला किया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत अपनी आपूर्ति शृंखला को विविधतापूर्ण बनाने के रास्ते पर है।

 

ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता

 

भारत की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य है ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना। किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम करके भारत वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव और राजनीतिक जोखिमों से खुद को सुरक्षित करना चाहता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदा, जिससे उसे काफी आर्थिक लाभ मिला। लेकिन इसके कारण अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक तनाव भी उत्पन्न हुआ। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्क और प्रतिबंध इसी तनाव का हिस्सा हैं।

 

अफ्रीकी देशों को नया अवसर

 

भारत की इस नई नीति से पश्चिम अफ्रीका के तेल उत्पादक देशों जैसे नाइजीरिया और अंगोला को बड़ा फायदा हो सकता है। इन देशों के लिए भारत जैसा बड़ा उपभोक्ता मिलना उनकी अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हो सकता है। नाइजीरिया से जो तेल आयात किया जा रहा है, वह फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर खरीदा गया है, यानी शिपिंग तक का खर्च नाइजीरिया वहन करेगा। वहीं, अबू धाबी से आने वाला तेल डिलीवर्ड टर्म्स पर खरीदा गया है, जिससे भारत के लिए आपूर्ति सुगम और सस्ती होगी।

 

व्यापक कूटनीतिक प्रभाव

 

इस नीति का प्रभाव सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि कूटनीतिक भी है। भारत अब ऊर्जा मामलों में ज्यादा स्वतंत्र और लचीला हो रहा है। वह वैश्विक राजनीतिक दबावों से बचते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है। अफ्रीका और मध्य पूर्व के साथ बढ़ता व्यापारिक संबंध भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से भी लाभदायक होगा। इससे भारत इन क्षेत्रों में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरेगा।

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