
लव जिहाद पर Supreme Court की कड़ी फटकार।
India Live:सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जबरन धर्मांतरण और लव जिहाद के खिलाफ बनाए गए कानूनों पर गंभीर चिंता जताते हुए छह राज्यों – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक और झारखंड – से जवाब माँगा है।

इन राज्यों में हाल के वर्षों में ऐसे कानून बनाए गए हैं।
जिनका उद्देश्य कथित तौर पर जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन को रोकना है, विशेषकर शादी के ज़रिए। इन कानूनों के तहत किसी व्यक्ति द्वारा धर्म बदलकर शादी करने की स्थिति में सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन इन प्रावधानों को लेकर कई संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर की हैं। उनका तर्क है कि ये कानून धार्मिक आज़ादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं, और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय के युवाओं को निशाना बनाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब दो बालिग आपसी सहमति से शादी करना चाहें, तो इसमें राज्य को हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे कानून संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है, और अनुच्छेद 25, जो धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, के खिलाफ नहीं हैं। अदालत का यह भी कहना था कि विवाह और धर्म का चुनाव व्यक्ति की निजी पसंद का मामला है, और यदि राज्य इस क्षेत्र में दखल देता है तो यह एक खतरनाक प्रवृत्ति बन सकती है। इस टिप्पणी के साथ ही कोर्ट ने सभी छह राज्यों को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि इन कानूनों को बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी और वे कैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते। इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि क्या ये कानून संवैधानिक रूप से वैध हैं या इन्हें रद्द किया जाएगा। इस बीच, यह मुद्दा देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है, जहाँ एक ओर कुछ लोग इसे सांस्कृतिक और धार्मिक सुरक्षा का ज़रिया मानते हैं, वहीं दूसरी ओर इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और हस्तक्षेप ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है और अब पूरे देश की नजर इस संवेदनशील मामले की आगे की सुनवाई पर टिकी हुई है।