
सचिव के आदेश को भी मानने को नहीं तैयार सात जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
हाइलाइट्स
(पारदर्शी योगी सरकार की साख पर लग रहे दाग)
(अधिकारियों की हीला हवाली से अभ्यर्थी हलाकान)
लखनऊ (राज्य ब्यूरो संवाददाता)। जहां एक तरफ योगी सरकार सबका साथ सबका विकास को लेकर जनहितकारी योजनाएं व न्यायालय के आदेशों को पारदर्शिता के साथ अनुपालन कर रही है। वहीं दूसरी तरफ बेलगाम बेसिक शिक्षा अधिकारियों के कारण उच्च अधिकारियों को उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में कठिनाइयों का सामना उठाना पड़ रहा है।
गणित विज्ञान 29334 शिक्षक भर्ती का मामला
29334 गणित विज्ञान शिक्षक भर्ती वर्ष जो 2013 में प्रारंभ हुई थी जो की पूर्ण नहीं हुई थी। जिसको लेकर अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक न्याय के लिए दरवाजा खटखटाया जिस पर लगभग आठ महीने पहले उच्चतम न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को निर्णय दिया कि वह अभ्यर्थी जो 31 दिसंबर 2019 तक उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में न्याय की गुहार लगा चुके हैं उन सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। जिसके लिए 19 जुलाई को शासन के उप सचिव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप चयन के निर्देश दिए।
गत 14 सितंबर को कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में सचिव महोदय ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से रिक्त पदों का विवरण मांगा। लेकिन 7 जिलों गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, जौनपुर, झांसी, ललितपुर और बलिया के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक अपने जनपद की रिक्त पदों का विवरण नहीं दिया। जिस कारण भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों की मनमानी
उच्च अधिकारियों के आदेश को भी ताक पर रखकर यह सात जनपद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने मनमाने रवैए पर आमादा है। लगता है उच्च अधिकारियों की कड़ी कार्यवाही के बाद ही यह रिक्त पदों का ब्यौरा सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को उपलब्ध कराएंगे। जूनियर हाई स्कूलों में गणित विज्ञान की इस भर्ती में कई मामले भी उजागर हुए हैं की चयन प्रक्रिया में धांधली भी हुई है की अभ्यर्थी और अधिकारियों की सांठ-गांठ से कम गुणांक के अभ्यर्थियों का चयन किया गया। शायद इसी को लेकर कहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हीला हवाली तो नहीं कर रहे हैं। 31 दिसंबर 2019 तक कोर्ट में न्याय की गुहार लगा चुके याचियो द्वारा लगातार अधिकारियों की गणेश परिक्रमा की जा रही है वहीं इसके साथ ही साथ सुबह के मुखिया माननीय योगी आदित्यनाथ से भी जनता दरबार में गुहार लगा चुके है। जिससे उनकी वर्षों की पीड़ा का निजात हो सके और वह भी समाज की मुख्य धारा में आकर अपना वह अपने परिवार का जीवन यापन कर सके।
इनसेट। एक तरफ शासन की मंशा उच्चतम न्यायालय के आदेश को पालन करने के लिए दिखाई पड़ रही है क्योंकि शासन द्वारा 19 जून को उच्चतम न्यायालय के अनुपालन में नियुक्ति पत्र देने व 27 अक्टूबर को रिमाइंडर देकर भर्ती प्रक्रिया करने के लिए निर्देशित किया। जिस परिपेक्ष्य में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने सभी जनपदों से रिक्त पदों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आदेश दिए। लेकिन यह सात जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिव के आदेश को भी मानने को तैयार नहीं है। अब आगे देखना यह है कि इन पर कोई कार्यवाही की जाती है कि यह अपने मनमाने रवैए के कारण बेरोजगार अभ्यर्थियों को और अधिक परेशान करने में सफल होते हैं। गत 8 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद जब फैसला हक में आया तो अधिकारियों के हीला हवाली में लटका हुआ है। आदेश के बाद अभ्यार्थियों को एक-एक दिन काटना जीना मुहाल हो रहा है। नियुक्ति की आस में कई याची हृदयाघात के कारण अकाल मौत का भी शिकार हो गए हैं और अधिकतर याची तनाव के शिकार हैं । नियुक्ति की आस में लगातार प्रयागराज व लखनऊ की गणेश परिक्रमा लगा रहे हैं।