
लखनऊ / उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। ‘एक डोज़, दो ज़िंदगी का वरदान’ के संकल्प के साथ, अब राज्य की गंभीर रूप से एनिमिक गर्भवती महिलाओं का उपचार इंट्रावीनस फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (IV-FCM) के माध्यम से किया जाएगा। इसकी केवल एक खुराक आयरन की कमी को तेजी से दूर करने में सक्षम है गुरुवार को लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में इसकी घोषणा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित कुमार घोष ने की।
6x6x6 मॉडल से एनीमिया पर प्रहार
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अमित कुमार घोष ने कहा, “राज्य सरकार एनीमिया की दर को कम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने 6x6x6 रणनीति (6 लाभार्थी समूह, 6 हस्तक्षेप और 6 संस्थागत व्यवस्थाएं) को सभी 75 जिलों में लागू किया है। इसके तहत छोटे बच्चों से लेकर गर्भवती महिलाओं तक को कवर किया जा रहा है।
अभियान की मुख्य बातें
आधुनिक उपचार: प्रदेश में गंभीर एनीमिया के लिए 3.7 लाख IV-FCM की खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं प्रशिक्षित स्टाफ: अब तक 10,000 से अधिक चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ नर्सों को इस नए प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है सरकारी संस्थानों पर भरोसा: NFHS-5 के अनुसार, यूपी में 83.4% प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो रहे हैं, जो सुरक्षित मातृत्व की दिशा में बड़ा बदलाव है।
सुधार के आंकड़े एक नज़र में
महानिदेशक (परिवार कल्याण) डॉ. हरिदास अग्रवाल ने बताया कि निरंतर प्रयासों से एनीमिया की दर में गिरावट दर्ज की गई है समूह पहले NFHS-3 अब NFHS-5 गर्भवती महिलाएं 52% 46% किशोरियां (10-19 वर्ष) 56.5% 52.9% बच्चे (6-59 माह) 73.9% 66.4% इसके अलावा, वर्ष 2024-25 के स्कोर कार्ड के अनुसार, यूपी में गर्भवती महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड (IFA) सप्लीमेंटेशन देने की कवरेज 95% तक पहुंच गई है।
विशेषज्ञों की राय
डॉ. रंजना खरे महानिदेशक, प्रशिक्षण उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर्स के नियमित प्रशिक्षण को इस कार्यक्रम की रीढ़ बताया डॉ. अजय गुप्ता (अपर निदेशक, RCH): उन्होंने बताया कि अब लक्ष्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाना और रियल-टाइम निगरानी को मजबूत करना है प्रो. डॉ. मोनिका अग्रवाल (KGMU): उन्होंने चेतावनी दी कि एनीमिया अक्सर किशोरावस्था से शुरू होता है, इसलिए शुरुआती जांच और पोषण पर ध्यान देना अनिवार्य है।
मीडिया से अपील
अमित कुमार घोष ने मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलने पर लोग समय रहते जांच और उपचार के लिए आगे आएंगे, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकेगी इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, यूनिसेफ, यूपीटीएसयू और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।