
नगर निगम लखनऊ की बैठकों में प्रशासनिक लापरवाही चरम पर — दो वर्षों से पारित प्रस्तावों पर नहीं हुई कार्रवाई, महापौर सुषमा खर्कवाल ने जताई कड़ी नाराजगी
नगर निगम लखनऊ की बैठकों में प्रशासनिक लापरवाही चरम पर — दो वर्षों से पारित प्रस्तावों पर नहीं हुई कार्रवाई, महापौर सुषमा खर्कवाल ने जताई कड़ी नाराजगी
लखनऊ: नगर निगम लखनऊ की कार्यकारिणी की गुरुवार को हुई बैठक एक बार फिर निगम प्रशासन की लापरवाही और निष्क्रिय कार्यशैली के कारण निर्णायक न बन सकी। बैठक की अध्यक्षता महापौर सुषमा खर्कवाल ने की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर निगम प्रशासन की उदासीनता और जनहित के मुद्दों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महापौर ने कहा कि कार्यकारिणी और सदन दोनों मिलकर जनता और कर्मचारियों से जुड़े विषयों पर निर्णय लेते हैं ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे, परंतु खेद की बात है कि प्रशासन लगातार जनप्रतिनिधियों द्वारा पारित निर्णयों को नजरअंदाज कर रहा है। इससे न केवल सरकारी धन बल्कि जनप्रतिनिधियों के समय की भी हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक अकर्मण्यता का उदाहरण है और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का खुला अपमान है।महापौर ने कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था, मार्ग प्रकाश, मृतक आश्रितों के अधिकार, जलभराव, टूटी सड़कों और नगर निगम की भूमियों पर अवैध कब्जों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशासन की कार्यशैली निराशाजनक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले नागरिकों और लोकनायकों के सम्मान से जुड़े प्रस्तावों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने नगर निगम के पुनरीक्षित बजट के मामले में प्रशासनिक लापरवाही को सबसे गंभीर बताया। महापौर ने कहा कि पुनरीक्षित बजट एक गोपनीय और अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जिस पर नगर आयुक्त, प्रभारी अधिकारी और विभागाध्यक्षों के साथ विस्तृत चर्चा आवश्यक होती है, लेकिन निगम प्रशासन ने इसे केवल चपरासी और डाक के माध्यम से उनके पास भेज दिया। उन्होंने कहा कि यह न केवल प्रक्रियागत गलती है बल्कि शहर के विकास की दिशा तय करने वाले दस्तावेज के प्रति प्रशासन की गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।महापौर ने कहा कि बजट कोई औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह शहर के विकास की दिशा निर्धारित करता है। इस तरह की उदासीनता प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्न उठाती है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि आज की कार्यकारिणी बैठक और पिछली बैठक में निगम प्रशासन ने जनता का धन और जनप्रतिनिधियों का समय व्यर्थ किया है। यह अत्यंत खेदजनक है कि दो वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कार्यकारिणी और सदन द्वारा पारित प्रस्तावों का अनुपालन नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक निगम प्रशासन पहले से लिए गए सभी निर्णयों का पालन नहीं करता, तब तक कार्यकारिणी की अगली बैठक नहीं बुलाई जाएगी। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया कि वह यह स्पष्ट करे कि निर्णयों के अनुपालन में कितना समय लगेगा ताकि उसी के आधार पर अगली बैठक की तिथि तय की जा सके।महापौर ने कहा कि लखनऊ की जनता ने जनप्रतिनिधियों पर विश्वास जताया है और यह उनका कर्तव्य है कि उस विश्वास की रक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन को यह समझना होगा कि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ हैं। यदि उनकी अनदेखी की जाती है, तो यह जनता का अपमान है। प्रशासन को जवाबदेह बनना ही होगा, तभी शहर में विकास की गति तेज़ हो सकेगी।नगर निगम लखनऊ की कार्यकारिणी समिति द्वारा वर्ष 2023 में पारित किए गए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इन प्रस्तावों पर अमल न होना निगम प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। 26 जून 2023 को आयोजित कार्यकारिणी बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों में निगम की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा और रिक्त पड़ी भूमि का सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। निर्णय यह भी था कि इन भूमियों का आवासीय और व्यावसायिक उपयोग कर निगम की आय में वृद्धि की जाए, किंतु अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।इसके बाद 2 सितंबर 2023 को हुई बैठक में भी कई प्रमुख प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए थे, लेकिन उन पर भी कोई अमल नहीं हुआ। इस बैठक में नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की आठ डिस्पेंसरी और गनेशगंज डिस्पेंसरी को निगम को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था, परंतु दो वर्ष बाद भी कार्य अधूरा है। इसी बैठक में फ्लाईओवरों और पुलों के नीचे हुए अतिक्रमण हटाकर सौंदर्यीकरण और पार्किंग क्षेत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया था, साथ ही पालतू जानवरों के शवों के सम्मानजनक निस्तारण हेतु स्थल चयन और शुल्क निर्धारण का कार्य नगर आयुक्त को सौंपा गया था। इसके अतिरिक्त बैटरी रिक्शा का लाइसेंस नगर निगम से जारी करने, पुरानी चुंगी के पास जर्जर रैन बसेरा तोड़कर कॉम्प्लेक्स निर्माण करने और ट्रांसपोर्ट नगर की पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शी निविदा प्रणाली लागू करने जैसे प्रस्ताव भी पारित हुए थे, किंतु उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।20 दिसंबर 2023 की बैठक में नक्खास बाजार में महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था। यह निर्णय महिला स्वच्छता और सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया था, किंतु यह प्रस्ताव भी अब तक धरातल पर नहीं उतर सका। इसी प्रकार नगर निगम लखनऊ के सामान्य सदन और विशेष बैठकों में वर्ष 2023 से 2025 तक लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय भी अधर में लटके हुए हैं।13 अगस्त 2023 को हुई स्थगित बैठक में आलमनगर वार्ड में कल्याण मंडप निर्माण, अवैध अतिक्रमणों को हटाने, नगर निगम कर्मचारियों के आश्रितों को कर में छूट देने, पार्कों और सड़कों के नामकरण तथा जलकल विभाग से संबंधित भत्तों और अवकाश भुगतान के मामलों पर निर्णय लिए गए थे, लेकिन आज तक किसी पर अमल नहीं हुआ। इसी तरह 23 नवंबर 2023 को आयोजित विशेष बैठक में मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों से प्रति शो शुल्क ₹25 से बढ़ाकर ₹100 करने का प्रस्ताव पारित हुआ था ताकि निगम की आय में वृद्धि हो सके, लेकिन यह निर्णय भी फाइलों में ही दबा रह गया।2 सितंबर 2024 को हुई बैठक में अमृत 2.0 कार्यक्रम के अंतर्गत सरोजनी नगर और ग्राम अमौसी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था, जो एक वर्ष बाद भी अधूरा है। इसी तरह 15 अप्रैल 2025 को हुई विशेष बैठक में नगर निगम और जलकल विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भवन कर, जलकर और सीवर कर से छूट देने का निर्णय हुआ था, लेकिन छह महीने बीतने के बावजूद उस पर भी कोई अमल नहीं किया गया।इन सभी प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने से नगर निगम प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। महापौर सुषमा खर्कवाल ने दो टूक कहा कि जब तक निगम प्रशासन पूर्व में पारित निर्णयों का अनुपालन नहीं करेगा, तब तक कार्यकारिणी की अगली बैठक नहीं बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता के प्रतिनिधियों की आवाज़ को अनदेखा करना जनता का अपमान है, और जब तक जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक लखनऊ के विकास की गति आगे नहीं बढ़ सकती।
