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बीबीएयू के डॉ. अंशुल अग्रवाल को तीन भारतीय पेटेंट, विद्युत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए मिला सम्मान

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बीबीएयू के डॉ. अंशुल अग्रवाल को तीन भारतीय पेटेंट, विद्युत इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए मिला सम्मान

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशुल अग्रवाल को सामाजिक उपयोग और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध के लिए हाल ही में तीन भारतीय पेटेंट प्रदान किए गए हैं। इन पेटेंटों के माध्यम से उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की दिशा में अहम योगदान दिया है।डॉ. अग्रवाल के शोध के प्रमुख क्षेत्र पावर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एसी से एसी पावर रूपांतरण, कन्वर्टर और इनवर्टर मॉडलिंग, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का ग्रिड से एकीकरण, हाइब्रिड वाहन तकनीक, एफपीजीए आधारित डिजाइन और सौर एवं पवन ऊर्जा प्रणाली के समेकन से जुड़े हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनका पहला पेटेंट एक ऐसी विधि से संबंधित है जो आंशिक छायांकन के प्रभावों को छाया फैलाव तकनीक से कम करती है। यह इमेज प्रोसेसिंग आधारित विधि स्थिर और गतिशील पुनर्संरचना के आधार पर उपयोगकर्ता की पसंद का विश्लेषण करती है। यह तकनीक सोलर रूफटॉप्स और सौर खेतों में उपयोगी साबित हो सकती है और इसे एकीकृत फोटोवोल्टिक प्रणालियों में भी विस्तार दिया जा सकता है।दूसरा पेटेंट एक फोटोवोल्टिक आधारित लचीले डीसी माइक्रोग्रिड सिस्टम से जुड़ा है, जो किसी भी अतिरिक्त ऊर्जा भंडारण प्रणाली के बिना ही सौर ऊर्जा की अनियमितता को नियंत्रित कर सकता है। इसमें सामुदायिक जल टैंकों का बहुउद्देशीय उपयोग प्रस्तावित किया गया है।तीसरे पेटेंट में एक एकल चरण की जल पंपिंग प्रणाली का उल्लेख है, जो घरेलू एवं औद्योगिक दोनों प्रकार के अनुप्रयोगों में इस्तेमाल की जा सकती है। यह ग्रिड और पीवी दोनों स्रोतों से ऊर्जा लेकर आवश्यकतानुसार कार्य करने में सक्षम है।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने डॉ. अंशुल अग्रवाल को उनकी इन विशिष्ट उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. अग्रवाल के नवाचार युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।इस उपलब्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अंशुल अग्रवाल ने कुलपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला है, जो उनके शोध कार्य में ऊर् इस अवसर पर विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी डॉ. अग्रवाल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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