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फ्रांस ने स्वीकार किया ईरान एक शक्तिशाली राष्ट्र है, बढ़ते तनाव के बीच बदला यूरोप का रुख?

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फ्रांस ने स्वीकार किया ईरान एक शक्तिशाली राष्ट्र है, बढ़ते तनाव के बीच बदला यूरोप का रुख?

IRAN WAR NEWS: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान को लेकर यूरोपीय देशों की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर है। फ्रांस ने हालिया कूटनीतिक संपर्कों में ईरान के साथ बातचीत और राजनयिक समाधान की जरूरत पर जोर दिया है। 22 सितंबर 2026 को फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की और क्षेत्रीय संकट के समाधान के लिए कूटनीति को आगे बढ़ाने की बात कही।

फ्रांस ने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को प्राथमिकता बताया। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस मार्ग का बाधित होना क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

हालांकि, फ्रांस ने ईरान के कई कदमों पर कड़ा रुख भी अपनाया है। पेरिस ने तेहरान स्थित फ्रेंच लैंग्वेज सेंटर को बंद किए जाने और फ्रांसीसी राजनयिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों पर आपत्ति जताई है।

ऐसे में मौजूदा स्थिति को केवल ईरान के समर्थन के रूप में देखना सही नहीं होगा। फ्रांस एक तरफ ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर चिंताएं जाहिर कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बातचीत और कूटनीति के जरिए संकट का समाधान खोजने पर भी जोर दे रहा है। सितंबर 2026 में फ्रांस समेत कई पश्चिमी देशों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर IAEA की निगरानी और NPT से जुड़ी प्रतिबद्धताओं को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच फ्रांस का यह संतुलित रुख इस बात को दर्शाता है कि ईरान को लेकर यूरोप की नीति केवल दबाव तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में तेहरान और पश्चिमी देशों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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