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दरिया-ए-फ़ुरात से सोना, सूडान जंग, क़यामत की निशानियों!

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दरिया-ए-फ़ुरात से सोना, सूडान जंग, क़यामत की निशानियों!

आजकल *सूडान* में हालात बहुत खराब हैं। वहाँ दो बड़े ग्रुप — एक सरकारी फौज (Sudanese Armed Forces) और दूसरा (Rapid Support Forces) — आपस में भयंकर लड़ाई लड़ रहे हैं। ये जंग ज़मीन या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि *सोने (Gold)* के लिए है। सूडान में दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार हैं, और दोनों गुट उन पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सोने से हथियार खरीदे जा रहे हैं और जंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई मज़दूर खदानों में जान गंवा चुके हैं, आम लोग भूख और डर में जी रहे हैं, और मुल्क में अमन का नामोनिशान नहीं रहा।

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि *“दरिया-ए-फ़ुरात (Euphrates River) से सोना निकल रहा है।”* बहुत से लोग इसे *क़यामत की निशानियों* से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि हमारे प्यारे नबी *हज़रत मुहम्मद ﷺ* ने इस बारे में बहुत पहले ही बता दिया था।

रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

> “फ़ुरात नदी अपना पानी हटा देगी और उसके नीचे से सोने का एक पहाड़ ज़ाहिर होगा। लोग उस पर लड़ेंगे। सौ में से निन्यानवे मारे जाएँगे, और हर शख्स कहेगा कि शायद मैं बच जाऊँ।”

नबी ﷺ ने ये भी फ़रमाया:
जो उस वक़्त वहाँ मौजूद हो, वो उस सोने में से कुछ भी न ले, क्योंकि उसमें बहुत बड़ा फ़ितना (आज़माइश) होगा।”

इसका मतलब ये है कि जब दुनिया में सोने और दौलत के लिए इतनी बड़ी लड़ाई होगी, तो वो क़यामत के करीब के दिनों की निशानी होगी। आज सूडान और दूसरे मुल्कों में जो लालच और खूनख़राबा हो रहा है, वो उसी हदीस की तरफ़ इशारा करता नज़र आता है।

क़यामत की दूसरी बड़ी निशानियाँ (जो नबी ﷺ ने बताईं)

क़यामत की बहुत सी निशानियाँ हैं — कुछ *छोटी निशानियाँ (Asghar)* हैं जो अब तक ज़ाहिर हो चुकी हैं, और कुछ *बड़ी निशानियाँ (Kubra)* हैं जो आख़िरी दौर में आएँगी।

छोटी निशानियाँ

1. *इल्म का खत्म होना* — लोग दीन की सच्ची जानकारी से दूर हो जाएँगे।
2. *झूठे लोगों की बढ़ोतरी* — झूठे दावेदार, झूठे आलिम, और झूठे पैग़म्बर पैदा होंगे।
3. *ज़ुल्म और फ़साद का फैलना* — हर जगह नाइंसाफी और खूनख़राबा होगा।
4. *बेहयाी और रिश्वत का आम होना* — लोग बुराई को बुराई नहीं समझेंगे।
5. *अमीर और गरीब का फासला बढ़ना* — दौलत कुछ लोगों के हाथ में सीमित हो जाएगी।
6. *आवाज़ और तसवीरें दूर-दूर तक फैलना* — यानी वो ज़माना आएगा जब लोग दूर बैठकर भी एक-दूसरे की बातें सुनेंगे और चेहरे देखेंगे (जो आज मोबाइल और इंटरनेट के ज़रिए हो रहा है)।

बड़ी निशानियाँ (Kubra Alamat-e-Qayamat)

1. *इमाम महदी का ज़ुहूर* — आख़िरी ज़माने में अल्लाह एक नेक और इंसाफ़पसंद रहनुमा भेजेगा जो पूरी दुनिया में इंसाफ़ कायम करेगा।
2. *दज्जाल का आना* — एक बहुत बड़ा फ़ितना जो खुद को खुदा कहेगा और झूठे मौजिज़े दिखाएगा।
3. *ईसा अ.स. (हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम) का नुज़ूल* — वो आसमान से उतरेंगे और दज्जाल को खत्म करेंगे।
4. *याजूज-माजूज (Gog and Magog) का निकलना* — ऐसे ख़तरनाक कौम जो दुनिया में तबाही मचा देंगी।
5. *तीन बड़े ज़लज़ले* — एक पूरब में, एक पश्चिम में और एक अरब में आएगा।
6. *धुआँ (Dukhan)* — एक ऐसा धुआँ जो पूरी दुनिया को ढक लेगा।
7. *सूरज का पश्चिम से निकलना* — जब ये होगा तो तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाएगा।
8. *जानवर का निकलना (Dabbat-ul-Ard)* — जो लोगों से बात करेगा और बताएगा कि कौन मोमिन है और कौन नहीं।
9. *आख़िरी लड़ाई (Malhama-e-Kubra)* — एक बहुत बड़ी जंग जो ईमान वालों और झूठ व बुराई की ताक़तों के बीच होगी। कहा गया है कि ये जंग شام (Syria) के इलाक़े में होगी, और इसके बाद दज्जाल का ज़ुहूर होगा।

आज जब हम सूडान, फिलिस्तीन, और बाकी जगहों के हालात देखते हैं, तो एहसास होता है कि वो समय करीब आ रहा है जब इंसानियत और ईमान की असली परीक्षा होगी। लेकिन डरने की नहीं, *तैयार रहने की ज़रूरत है*।

हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ करें, नमाज़ और इबादत में पक्के हों, झूठ और ज़ुल्म से दूर रहें, और इंसानियत की ख़िदमत करें। नबी ﷺ ने फरमाया:

> “अक़लमंद वो है जो अपने नफ़्स का हिसाब करे और आख़िरत के लिए तैयारी रखे।”

सूडान की ये सोने की जंग सिर्फ़ एक सियासी या आर्थिक मामला नहीं है — ये हमें याद दिला रही है कि *दुनिया की दौलत एक इम्तेहान है*। जब माल के लिए इंसान इंसान का खून बहाने लगे, तो समझ लो कि वक़्त बहुत क़रीब है।
क़यामत ज़रूर आएगी, लेकिन हम कोशिश करें कि वो दिन हमारे लिए *रहमत का दिन* हो, *अज़ाब का नहीं।*

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