
इजराइल में बंपर वोटिंग, 53 साल का रिकॉर्ड टूटा: क्या नेतन्याहू की सत्ता से होगी विदाई?
तेल अवीव/यरुशलम। इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को हो रहे आम चुनाव ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को लेकर पूरे देश की निगाहें चुनाव पर टिकी हैं। मतदान के शुरुआती घंटों में मतदाताओं ने जिस उत्साह के साथ अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, उसने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। मतदान की रफ्तार के मामले में इजराइल ने कई दशकों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ने के संकेत दिए हैं। हालांकि, नेतन्याहू की सत्ता से विदाई होगी या वह एक बार फिर सरकार बनाने में सफल होंगे, इसका अंतिम फैसला चुनाव परिणाम और सरकार गठन की प्रक्रिया से ही होगा।
53 साल बाद मतदान ने पकड़ी रिकॉर्ड रफ्तार
इजराइल के चुनाव में इस बार मतदाताओं की भागीदारी खास चर्चा का विषय बनी हुई है। शुरुआती मतदान के आंकड़ों के अनुसार, मतदान केंद्रों पर लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक करीब 16.7 प्रतिशत मतदाता मतदान कर चुके थे। यह 1996 के बाद इसी समय तक दर्ज सबसे ऊंचे मतदान स्तरों में शामिल है।
इसके बाद सुबह से दोपहर तक मतदान की रफ्तार में तेजी दर्ज की गई। दोपहर 12 बजे तक मतदान लगभग 31.5 प्रतिशत पहुंचने की खबर सामने आई, जिसे 1977 के बाद इस समय तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया। इससे स्पष्ट है कि इजराइल के मतदाता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। हालांकि, मतदान की शुरुआती रफ्तार और पूरे दिन का अंतिम मतदान प्रतिशत अलग-अलग आंकड़े होते हैं। इसलिए अंतिम रिकॉर्ड की पुष्टि आधिकारिक आंकड़ों से ही होगी।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इजराइल और एल पाइस की चुनावी रिपोर्ट।
नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
बेंजामिन नेतन्याहू इजराइल की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। वह कई कार्यकालों में देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। दिसंबर 2022 में दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार को सुरक्षा, न्यायिक सुधार, गाजा युद्ध और आंतरिक राजनीतिक मतभेदों जैसे कई बड़े मुद्दों का सामना करना पड़ा।
इस बार चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके सहयोगी दलों के सामने विपक्षी गठबंधन की चुनौती है। विपक्ष की ओर से पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। वह देश की सुरक्षा नीति, सरकार की जवाबदेही और भविष्य की दिशा को लेकर बदलाव का मुद्दा उठा रहे हैं।
चुनाव से पहले सामने आए जनमत सर्वेक्षणों में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दिया। किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में चुनाव का परिणाम केवल सबसे बड़ी पार्टी की जीत से तय नहीं होगा, बल्कि सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय समर्थन जुटाना भी अहम होगा।
7.3 मिलियन से ज्यादा मतदाता, 120 सीटों पर मुकाबला
इस चुनाव में लगभग 73.3 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। उन्हें इजराइल की संसद नेसेट की 120 सीटों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करना है। देश में बहुदलीय संसदीय व्यवस्था है और सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है।
इजराइल की चुनावी व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। चुनाव के बाद सीटों की संख्या और दूसरे दलों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने की संभावनाएं तय होती हैं। राष्ट्रपति संबंधित राजनीतिक नेताओं से परामर्श के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं।
इसी वजह से किसी दल का सबसे अधिक सीटें जीतना अपने आप में सरकार बनाने की गारंटी नहीं है। यदि नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे रह जाता है और विपक्षी दल पर्याप्त समर्थन जुटा लेते हैं, तो देश में नई सरकार बन सकती है।
सुरक्षा और युद्ध बने चुनाव के बड़े मुद्दे
इस बार का चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद हो रहा पहला आम चुनाव है। इसके कारण सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया एजेंसियों की भूमिका और सरकार की जवाबदेही जैसे सवाल चुनावी बहस के केंद्र में हैं।
गाजा में युद्ध, क्षेत्रीय संघर्ष, ईरान के साथ तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की स्थिति भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसके अलावा महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और धार्मिक तथा राजनीतिक मतभेदों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।
नेतन्याहू अपने सुरक्षा रिकॉर्ड और क्षेत्रीय नीतियों को सरकार की उपलब्धियों के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं, उनके विरोधी मौजूदा नेतृत्व की नीतियों और सुरक्षा संबंधी विफलताओं पर सवाल उठा रहे हैं।
नेतन्याहू की होगी विदाई?
बंपर मतदान और विपक्ष की चुनौती ने इजराइल के चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। अधिक मतदान का लाभ किस राजनीतिक खेमे को मिलता है, यह मतों की गिनती और सीटों के अंतिम आंकड़ों से ही स्पष्ट होगा। खास तौर पर अरब मतदाताओं की भागीदारी भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल, चुनाव के बाद यदि कोई भी गठबंधन 61 सीटों का समर्थन नहीं जुटा पाता है, तो सरकार गठन में लंबा समय लग सकता है। इस दौरान नेतन्याहू नई सरकार के शपथ लेने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं।

इजराइल की राजनीति के लिए यह चुनाव निर्णायक साबित हो सकता है। रिकॉर्ड मतदान की रफ्तार, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला तथा क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौतियां आने वाले दिनों में देश की राजनीतिक दिशा तय करेंगी। अब पूरी दुनिया की निगाहें अंतिम मतदान प्रतिशत, सीटों के बंटवारे और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं।