
लखनऊ हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की दर्दनाक शहादत की याद में इमामबाड़ा नाजिम साहब विक्टोरिया स्टीट से कर्बला के शहीदों के चेहलुम का जुलूस निकाला गया जो कर्बला तालकटोरा जाकर संपन्न हुआ। जुलूस में हजारों अजादार शरीक हुए जिसमें पुरूषों के साथ पर्दानशीन महिलाएं व बच्चे शामिल थे। जुलूस की मजलिस को मौलाना कल्बे अहमद ने खिताब किया।

मजलिस के बाद इमामबाड़े से अंजुमनों के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ तो अजादारों की आंखें नम हो गईं। जुलूस में शहर की करीब दो सौ से अधिक मातमी अंजुमनें अपने अलम के साथ नौहाख्वानी व सीनाजनी करती चल रही थीं। अंजुमनों के साहिबे बयाज चेहलुम पर ऐतिहासिक नौहे पढ़ रहे थे, जिन्हें सुन अजादारों की आंखों से आंसू जारी हो गए। जुलूस इमामबाडा नाजिम साहब से निकलकर नक्खास चौराहा, टूरियागंज, हैदरगंज, बुलाकी अड्डा, एवारेडी चौराहा होते हुए तालकटोरा कर्बला में संपन्न हुआ। इस दौरान अजादारों ने जंजीर और कमा का मातम भी किया।

जुलूस में सबसे पीछे अंजुमन रौनके दीने इस्लाम, हजरत औन व मोहम्मद, हजरत अली अकबर, हजरत अली असगर और हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) के ताबूत व गहवारा, ऊंटों पर अमारियां, जुलजनाह और हजरत अब्बास (अ.स.) की निशानी अलम के साथ नौहाख्वानी व सीनाजनी करती हुई शामिल हुई। अकीदतमंदों ने जियारत कर दुआएं मांगी। शाम तक अंजुमनें कर्बला तालकटोरा पहुंच गईं थीं। कर्बला में अलविदाई मजलिस के बाद जुलूस सम्पन्न हुआ।

इराक की तर्ज पर लखनऊ में भी अरबाईन वॉक,शामिल हुए हजारों अजादार
इमाम के चेहलुम के मौके पर दुनिया भर से लाखों अजादार हर साल कर्बला इराक जाते हैं और वहां नजफ शहर स्थित रौजाए हजरत अली (अ.स.) से रौजाए इमाम हुसैन (अ.स.) कर्बला तक 80 किलो मीटर पैदल सफर करते हैं। जिसे अरबाईन वॉक कहते है। इसी तर्ज पर अजादारों ने इमामबाड़ा शाहनजफ हजरतगंज, रौजाए हजरत अली सरफराजगंज, हरदोई और कर्बला अब्बासिया बक्शी का तलाब से कर्बला तालकटोरा के लिए पैदल सफर तय किया।

जिसमें पुरूष, महिलाएं व बच्चों के साथ हजारों अजादार शामिल हुए। बक्शी का तालाब से आये अजादारों के शिया पीजी कालेज सीतापुर रोड पर गुलामाने हजरत मुख्तार फेडरेशन हसन पुरिया के सदस्यों ने पैर दबा कर उनकी खिदमत की। पैदल आये जायरीन के लिए असद मोहानी की ओर से शहीद स्मारक रोड पर सबीले अली असगर (अ.स) सहित अनेक इदारों व अजादारों ने जगह कैम्प लगा कर पर खाने पीने के विषेश इंतजाम किये थे।

शहीदों के नाम पर सबीलों के विशेष इंतजाम
चेहलुम के मौके पर विक्टोरिया स्ट्रीट से लेकर कर्बला तालकटोरा व कर्बला इमदाद हुसैन खा के पास तक विभिन्न इदारों की तरफ से चाय, काफी, दूध, बिरयानी, दाल-चावल, खिचड़ा, बिस्कुट, शीरमाल, चाकलेट, विभिन्न तरह के शर्बत,फ्रूट ,जूस व चिप्स, आदि का वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त कई सचल सबीले भी जुलूस के साथ चल रही थी।

बहत्तर शहीदों की हुई नज्र ,देर रात तक चली मजलिसें
कर्बला के शहीदों के चेहलुम पर अजादारों ने घरों में मुख्य रूप से खड़ी मसूर की दाल-चावल, दूध, शर्बत व पानी पर अकीदत के साथ नज्र दी, नज्र चखते ही आंखों से आंसू जारी हो गये। अजाखाने अबुल फजलिल अब्बास हसन पुरिया में मजलिस को मौलाना मोहम्मद अस्करी ने खिताब किया। इसके बाद बहत्तर शहीदों की नज्र दी गयी।

कराई जौ के ताजिये की जियारत
लखनऊ। चेहलुम के मौके पर कर्बला तालकटोरा में जौ से बने ताजिये की जियारत कराई गई। यह ताजिया अजाखाना अनवर साहब कश्मीरी मोहल्ला में तैयार किया जाता है और कर्बला तालकटोरा ले जाया जाता है। ताजिया बनाने में पहले बांस का ढांचा तैयार किया जाता है फिर कपड़ा व रूई लगायी जाती है। उसके बाद दस सफर को जौ बो दिये जाते हैं 15 सफर को ताजिये को इमामबाड़े में रख जाता है,

जहां लोग इसकी जियारत करने आते हैं शबे चेहलुम शब्बेदारी करके चेहलुम को अपने रिश्तेदारों व अजीजों के साथ कर्बला तालकटोरा ले जाते हैं। जहां लोग दिन भर इसकी जियारत करते हैं। उसके बाद बड़ी अकीदत के साथ ताजिया दफन कर दिया जाता है। ताजिया बनाने वाले अतहर हुसैन बताते हैं कि जौ का ताजिया उनके दादा मेहदी हुसैन के जमाने से बनाया जा रहा है। इस ताजिये को बनाने के लिए उनको ख्वाब (सपना) आया था।

जुलूस में शामिल थे फूलों सहित फ्रूट व ड्राईफ्रूट के पटके
लखनऊ। जुलूस में अंजुमनें अपने अलमों को फूलों के अलावा फ्रूट व ड्राई फ्रूट के पटकों से सजाये थे। पटकों में ताल मखाना, नारियल, छुआरा,अखरोट सेब व अनार लगाये थे। रास्ते भर अजादार अलमों को बोसा देते चल रहे थे। पटकों में पंजेटन, 12 इमाम तो किसी में 14 मासूमीन के नाम लिखे थे।