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नारीबारी में धड़ल्ले से बिक रहा ‘मौत का सौदा’ — चौकी से पांच सौ मीटर दूरी पर गांजे की खुलेआम बिक्री, प्रशासन मौन!

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नारीबारी में धड़ल्ले से बिक रहा ‘मौत का सौदा’ — चौकी से पांच सौ मीटर दूरी पर गांजे की खुलेआम बिक्री, प्रशासन मौन!

HIGHLIGHTS:

युवाओं को नशे में धकेल रहा गिरोह, ग्रामीणों की पुकार—“पुलिस की नाक के नीचे चल रहा कारोबार, आखिर संरक्षण किसका?”

नारीबारी में अवैध गांजे का साम्राज्य, चौकी से कुछ कदम दूर ही नशे का अड्डा — जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में

(सिटीजन वॉयस:  आमिर मिर्ज़ा :संवाददाता : प्रयागराज)

नारीबारी, प्रयागराज:  यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत नारीबारी चौकी से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर अवैध गांजा बिक्री का धंधा इतने बेखौफ तरीके से चल रहा है कि स्थानीय लोग अब भय और गुस्से में हैं। ग्रामीणों के अनुसार बाजार में पच्चास से लेकर सौ रुपये तक की गांजे की पुड़िया खुलेआम बेची जा रही है और यह सौदा लंबे समय से लगातार फल-फूल रहा है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस चौकी के पास नशे का यह कारोबार पनप रहा है, वही पुलिस इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम क्यों?— पुलिस चौकी से इतनी नज़दीक दूरी पर गोरखधंधा — क्या आंखें बंद हैं या संरक्षण?—ग्रामीणों का साफ आरोप है कि नशे के इस अवैध धंधे के बावजूद नारीबारी चौकी की पुलिस, और यमुनानगर जोन के अफसर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके।—लोगों का कहना है कि जब बिक्री चौकी से कुछ ही मीटर दूर हो रही है, तो पुलिस को इसकी जानकारी न होना असंभव है। ऐसे में सवाल उठता है कि या तो यह कारोबार पुलिस की जानकारी में है—या फिर संरक्षण में।—युवाओं की जिंदगी खतरे में, माता-पिता में दहशत— दिनदहाड़े गांजे की बिक्री से आसपास के गांवों और बाजार में माहौल बिगड़ रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि क्षेत्र के कई किशोर और युवक नशे की जद में आते जा रहे हैं।—अभिभावक बेहद चिंतित हैं—“अगर चौकी और थाना मिलकर भी नशे को नहीं रोक पा रहे, तो आखिर हमारी सुरक्षा करेगी कौन?”—गांजा बेचने वालों का हौसला बुलंद, कार्रवाई जीरो — जिम्मेदार कौन?— जिन अधिकारियों का कर्तव्य है कि नशे जैसी जघन्य गतिविधि को रोकें, उनमें शामिल हैं—नारीबारी चौकी इंचार्ज – इलाके में खुली नशे की बिक्री पर शून्य कार्यवाई – पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज – नशे को मिटाने की बड़ी योजनाओं का दावा, लेकिन जमीनी हकीकत में सन्नाटा स्थानीय लोगों की मानें तो नशे के कारोबारियों का इतना हिम्मतवर होना तभी संभव है जब किसी स्तर पर अंदरूनी संरक्षण, लापरवाही, या मौन स्वीकृति हो।ग्रामीणों की मांग — तुरंत गिरफ़्तारी, बड़े स्तर पर छापेमारी और पुलिस लाइन हाज़िरी— ग्रामीणों ने मांग की है कि—पूरे क्षेत्र में नारकोटिक्स रोधी टीम भेजी जाए—नारीबारी चौकी की लापरवाह टीम पर जांच बैठाई जाए—गांजा बेचने वाले पूरे गिरोह की गिरफ़्तारी की जाए— इलाके को “नशा मुक्त ज़ोन” घोषित कर निगरानी बढ़ाई जाए—नशे के बढ़ते धंधे ने न सिर्फ सामाजिक माहौल बिगाड़ दिया है, बल्कि पुलिस की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं

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