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चाहती है ये शगुफ्ता तेरा दर रौशन हो, मेरा दिल है कि तेरे हक में दुआ चाहता है

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सालार गंज के सालाना उर्स के मौके पर शानदार ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन, नामवर शायरों की शिरकत

लखनऊ, तहसील बिसवां, सीतापुर में स्थित ऐतिहासिक मौजा सालार गंज के सालाना उर्स के मौके पर शानदार ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली, देवबंद, लखनऊ, काकोरी और देश के विभिन्न हिस्सों से तशरीफ लाए शायरों ने अपने कलाम से सामईन को खूब महज़ूज़ किया। रात गए तक चले इस मुशायरे की सदारत दिल्ली के वरिष्ठ शायर मोहन मुन्तज़िर ने की, जबकि निज़ामत के फ़राइज़ आसिम काकोरवी ने बखूबी अंजाम दिए। फख्र हिंदुस्तान फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित इस मुशायरे के ऑर्गेनाइज़र आरिफ अलवी और कन्वीनर मोहम्मद आरिफ ने मेहमानों का इस्तकबाल शॉल और फूल पेश कर किया।

कार्यक्रम में रिज़वान अहमद बिल्डर और समाजसेवी सईद हाशमी मेहमान-ए-ख़ुसूसी के तौर पर मौजूद रहे, जबकि भोजपुरी फिल्म अभिनेता संग्राम पटेल समेत कई सामाजिक हस्तियां मेहमान-ए-ज़ीवकार के रूप में शामिल हुईं। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे और शायरों को खूब दाद-ओ-तहसीन से नवाज़ा गया। कार्यक्रम में पेश किए गए चुनिंदा अशआर नज़र-ए-क़ारईन हैं रंग-बिरंगे बाग में देखो जादू रोके बैठे हैं फूल खिले हैं लेकिन अपनी खुशबू रोके बैठे हैं  मोहन मुन्तज़िर “फसाद करके जो बैठे हैं अपनी कुर्सी पे उन्हें बताओ कि मौसम बदलने वाला है अकमल बलरामपुरी “उम्र की आख़िरी मंज़िल पे पहुंचकर वालिद बोझ बन जाता है क्यों बोझ उठाने वाला  यासीन इब्न उमर “मुहब्बत में ये दिल मैं हार बैठा ये समझो कि शहादत हो गई है  आसिम काकोरवी “मशवरा मेरा ये है बार-बार रहना है मतलबी ज़माना है होशियार रहना है अमजद खान अमजद “आप हैं साथ किसी शै की ज़रूरत कैसी है प्यार से बढ़कर भला और है दौलत कैसी है सना महमूदाबादी “चाहती है ये शगुफ्ता तेरा दर रौशन हो मेरा दिल है कि तेरे हक में दुआ चाहता है  शगुफ्ता अंजुम इसके अलावा सुहैल आतिर, ग़फरान चलबली, सतीम रोशन, हाफिज अशफाक, अफ्फान सीतापुरी, गुलज़ार खैराबादी आदि ने भी अपना कलाम पेश किया।

अंत में कन्वीनर मुशायरा मोहम्मद आरिफ ने सभी मेहमानों और उपस्थित लोगों का शुक्रिया अदा किया। शगुफ्ता अंजुम ने गीत-ग़ज़लों से समां बांधा ऑल इंडिया मुशायरे में जहां सभी शायरों ने अपने उम्दा कलाम से दिल जीत लिया, वहीं युवा शायरा शगुफ्ता अंजुम ने अपनी अनोखी ग़ज़लों, गीतों और पूरबी गीतों से सामईन पर जैसे सहर तारी कर दिया। उनकी एक के बाद एक ग़ज़लों पर श्रोता मंत्रमुग्ध दिखाई दिए। सामईन की फ़रमाइश पर उन्होंने पसंदीदा ग़ज़लें सुनाकर खूब दाद हासिल की। साथ ही मुशायरे के आयोजकों के हुस्न-ए-इंतिखाब की भी सराहना की गई।

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