diwali horizontal

ट्रंप की ओमान को धमकी: ओमान पर होगी बमबारी?

0 27

ट्रंप की ओमान को धमकी: ओमान पर होगी बमबारी?

IRAN US WAR: इस वक्त की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर ईरान, अमेरिका और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ओमान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ओमान ईरान के साथ बातचीत के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर किसी ऐसे समझौते की तरफ बढ़ता है, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ जाता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह बयान इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका और ओमान के बीच तनाव इतना बढ़ क्यों गया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ऐसा क्या है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

 

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी क्षेत्र का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल व्यापार के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचते हैं। इसलिए अगर इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही रुकती है या इसमें किसी तरह की बड़ी रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका लगातार इस रास्ते को खोलने पर जोर दे रहा है।

अब आते हैं अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौते पर, जिसकी चर्चा इस समय सबसे ज्यादा हो रही है। जून में अमेरिका और ईरान के बीच एक 60 दिन का समझौता हुआ था। इस समझौते में युद्ध रोकने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे बातचीत करने की बात थी। समझौते के तहत ईरान को जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने की दिशा में काम करना था और अमेरिका को भी अपनी कुछ आर्थिक और समुद्री पाबंदियों में राहत देने की दिशा में आगे बढ़ना था। लेकिन 60 दिन की तय समयसीमा खत्म हो गई और कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका।

यही वह जगह है जहां ओमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। ओमान के ईरान और अमेरिका दोनों से संबंध हैं और वह पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। हाल के दिनों में ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर बातचीत हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक संभावित व्यवस्था में जहाजों के सुरक्षित गुजरने और समुद्री सेवाओं से जुड़े नियमों पर चर्चा हुई है। लेकिन अमेरिका इस बात को लेकर चिंतित है कि कहीं ऐसा कोई समझौता न हो जाए, जिससे होर्मुज पर ईरान की भूमिका और मजबूत हो जाए।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसी मुद्दे पर ओमान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। 17 अगस्त को ट्रंप ने कहा कि अगर ओमान ईरान के साथ अमेरिकी समझौते के रास्ते में आता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पहले से ही मुश्किल दौर में है। ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है और वह ईरान से ऐसा समझौता चाहते हैं जिसे अमेरिका स्वीकार कर सके।

दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका को अपनी नाकेबंदी और दबाव की नीति में बदलाव करना होगा। ईरान की तरफ से यह मांग भी सामने आती रही है कि अमेरिकी सैन्य दबाव कम किया जाए और ईरान की संप्रभुता का सम्मान किया जाए। यानी दोनों देशों के बीच समस्या सिर्फ परमाणु कार्यक्रम की नहीं है। इसमें समुद्री रास्ता, प्रतिबंध, सैन्य मौजूदगी और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। इसी वजह से बातचीत किसी आसान नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही है।

अब सवाल यह है कि अमेरिका ओमान से इतना नाराज क्यों है? इसकी सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अलग-अलग पक्षों की सोच है। अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहे और जहाजों की आवाजाही पर किसी एक देश का नियंत्रण न हो। वहीं ईरान इस क्षेत्र में अपने प्रभाव और सुरक्षा हितों को महत्वपूर्ण मानता है। ओमान इस पूरे विवाद में बातचीत और मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अमेरिकी प्रशासन को डर है कि इस प्रक्रिया में ईरान को ऐसा फायदा न मिल जाए, जिससे भविष्य में होर्मुज पर उसका प्रभाव और बढ़ जाए।

यहां एक और बात समझना जरूरी है। ओमान कोई ऐसा देश नहीं है जो इस युद्ध का मुख्य पक्ष हो। बल्कि लंबे समय से ओमान को एक अपेक्षाकृत तटस्थ देश माना जाता है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का रास्ता बनाए रखने की कोशिश की है। इसलिए ट्रंप की तरफ से ओमान के खिलाफ इस तरह की चेतावनी ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ओमान के बीच तनाव और बढ़ता है तो इससे ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं।

इस पूरे मामले में IRGC यानी ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका की भी चर्चा होती है। ईरान के सैन्य और सुरक्षा ढांचे में IRGC का महत्वपूर्ण स्थान है और होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर अमेरिका लगातार चिंता जताता रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और प्रतिबंधों को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है। यही टकराव इस पूरे संकट को लगातार गंभीर बनाए हुए है।

अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द खुलेगा? फिलहाल इसका कोई पक्का जवाब नहीं है। हाल की बातचीत में कुछ संभावित व्यवस्थाओं पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन जहाजों की आवाजाही, फीस, निरीक्षण और समुद्री प्रशासन जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद हैं। रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रस्तावों में जहाजों के प्रवेश, माल की जांच और शुल्क को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। इसलिए सिर्फ नेताओं के बयानों से यह मान लेना सही नहीं होगा कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। असली बदलाव तब माना जाएगा जब नियमित रूप से जहाजों की आवाजाही शुरू हो, व्यापार सामान्य हो और समुद्री जोखिम कम हो।

60 दिन के समझौते की समयसीमा खत्म होने के बाद अब स्थिति पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गई है। अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहता है, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर बातचीत चाहता है। इसी बीच ओमान दोनों के बीच बातचीत का रास्ता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन ट्रंप की ताजा धमकी ने इस कूटनीतिक प्रक्रिया को और मुश्किल बना दिया है। अगर अमेरिका और ओमान के बीच तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ इन दोनों देशों पर नहीं बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर इस वक्त दुनिया की नजर तीन चीजों पर है—पहला, क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से गंभीर बातचीत शुरू होती है; दूसरा, क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य हो पाती है; और तीसरा, क्या ओमान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए किसी समझौते तक पहुंचने में मदद कर पाता है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण है और किसी भी बड़े फैसले का असर तेल, व्यापार और पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं

Leave A Reply

Your email address will not be published.