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ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान: उत्तर क्षेत्रीय विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रस्तुत की राज्य की उपलब्धियाँ

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ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान: उत्तर क्षेत्रीय विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने प्रस्तुत की राज्य की उपलब्धियाँ

लखनऊ/चंडीगढ़: भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को चंडीगढ़ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय विद्युत मंत्रियों के सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने भाग लेते हुए प्रदेश की ऊर्जा क्षमताओं, उपलब्धियों और आगामी जरूरतों को विस्तार से प्रस्तुत किया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की, जिसमें उत्तर भारत के कई राज्यों के ऊर्जा मंत्री एवं उच्चाधिकारी शामिल हुए।सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बीते आठ वर्षों में राज्य ने विद्युत उत्पादन, पारेषण और आपूर्ति के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति की है। मार्च 2017 में जहां प्रदेश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता 15,000 मेगावाट थी, वह अब बढ़कर 25,000 मेगावाट हो गई है। वहीं, पारेषण उपकेंद्रों की क्षमता 39,159 एमवीए से बढ़कर 1,99,500 एमवीए तक पहुँच चुकी है। ट्रांसमिशन लाइनों की लंबाई भी 7,502 सर्किट किलोमीटर से बढ़कर 62,483 सर्किट किलोमीटर हो गई है, जो राज्य की बुनियादी संरचना में क्रांतिकारी सुधार का संकेत है।ए.के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार तीन वर्षों से विद्युत आपूर्ति के मामले में महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से आगे निकलकर देश में शीर्ष पर बना हुआ है। 2024 में प्रदेश ने 30,618 मेगावाट की अधिकतम विद्युत आपूर्ति दर्ज की, जबकि महाराष्ट्र और गुजरात क्रमशः 28,924 व 25,588 मेगावाट पर रहे।मंत्री ने बताया कि जुलाई से सितंबर 2025 के दौरान प्रदेश में 32,500 मेगावाट तक की मांग का अनुमान है, जिसके लिए राज्य पूरी तरह तैयार है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश ने संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार की है और केंद्र सरकार की कई प्रमुख योजनाओं जैसे RDS-S और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-II में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है।हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3,960 मेगावाट की नई ताप विद्युत उत्पादन क्षमता का लोकार्पण उत्तर प्रदेश में किया गया, जिससे राज्य की कुल उत्पादन क्षमता अब 8,500 मेगावाट तक पहुँच चुकी है। यह 2017 की तुलना में लगभग दोगुनी और 2022 की तुलना में 1.5 गुना अधिक है।ग्रीन एनर्जी की दिशा में भी राज्य अग्रसर है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-2 के तहत 4 गीगावाट की हरित ट्रांसमिशन क्षमता विकसित की जा रही है और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-3 की योजना भारत सरकार को प्रस्तुत की गई है, जिसमें 17 गीगावाट क्षमता और 2,200 किमी लंबाई की विद्युत लाइनों का निर्माण प्रस्तावित है।
मंत्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास अब 17,000 मेगावाट से अधिक की आंतरिक उत्पादन क्षमता है, जो किसी भी राज्य से सबसे अधिक है। पारेषण नेटवर्क में भी राज्य ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने हेतु 48 रिजर्व टावर तैयार रखे हैं।राज्य की मौजूदा पारेषण प्रणाली में 698 उपकेंद्र, 1,99,347 एमवीए की ट्रांसमिशन क्षमता और 58,672 सर्किट किमी की लाइनें हैं, जिन्हें वर्ष 2029-30 तक क्रमशः 816 उपकेंद्र, 2,73,542 एमवीए और 71,900 सर्किट किमी तक विस्तार देने की योजना है। इसी अवधि में कुल उत्पादन क्षमता 60,985 मेगावाट तक ले जाने की रूपरेखा भी तैयार है।अंत में मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश, जो कभी विद्युत व्यवस्था की बदहाली के लिए जाना जाता था, आज केंद्र और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में देश का सबसे अग्रणी राज्य बन चुका है। यह परिवर्तन प्रदेश की तकनीकी प्रगति, दूरदृष्टिपूर्ण नीतियों और प्रशासनिक दृढ़ता का परिणाम है।

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