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बिहार में वोटर लिस्ट का बड़ा विवाद! 69 लाख नाम कटे?

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बिहार में वोटर लिस्ट का बड़ा विवाद! 69 लाख नाम कटे?

इंडिया Live:पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने बिहार में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता और सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग के इस कदम को लेकर उनका आरोप है कि लगभग 69 लाख वोटरों के नाम बिना किसी नोटिस या पूर्व सूचना के काटे गए हैं, जिससे लोकतंत्र की जड़ें खतरे में पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के जरिए खासतौर पर गरीब, मजदूर और पिछड़े वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।

पप्पू यादव के अनुसार, यह कोई सामान्य मतदाता सूची संशोधन नहीं है, बल्कि एक ऐसी कार्रवाई है जो बड़े पैमाने पर लोगों को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश लगती है।

उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि वे पूरी पारदर्शिता के साथ इस प्रक्रिया की व्याख्या करें और स्पष्ट करें कि किस आधार पर इतने लाखों नाम काटे गए हैं। उनके सवाल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वोटर लिस्ट में कितने बांग्लादेशी, रोहिंग्या और नेपाली नागरिक शामिल हैं, जिन्हें पप्पू यादव ने देश के संविधान और चुनावी नियमों के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों का मतदाता सूची में शामिल होना न केवल चुनाव की निष्पक्षता को खतरे में डालता है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

इसके साथ ही, पप्पू यादव ने कहा कि अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ एक बड़ा हमला होगा। उन्होंने बिहार की जनता और देशवासियों से इस मुद्दे पर जागरूक रहने और अपने वोटर अधिकारों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उनका मानना है कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा हथियार वोट का अधिकार है और इसे किसी भी सूरत में छीना नहीं जाना चाहिए।

पप्पू यादव ने इस मसले को लेकर चुनाव आयोग और सरकार से कई सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा कि इस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में कितने नाम सच में निरस्त किए गए हैं, कितने लोगों को नोटिस दिया गया, और कितने लोगों ने अपना पक्ष रखा। साथ ही यह भी पूछा कि क्या गरीब और कमजोर वर्ग के मतदाताओं को इस प्रक्रिया के दौरान उचित अवसर मिला या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और आयोग इस मामले में पारदर्शी नहीं होंगे, तो यह सत्तारूढ़ दल के चुनावी फायदे के लिए किए गए प्रयासों जैसा लगेगा।

उन्होंने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने मतदाता पहचान पत्र, मतदाता सूची और अपने वोटर अधिकारों को लेकर पूरी सावधानी बरतें। साथ ही, उन्होंने कहा कि जो भी लोग इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं, वे उचित माध्यमों से अपनी आवाज उठाएं और न्याय की मांग करें। पप्पू यादव ने चुनाव आयोग को भी चेतावनी दी है कि अगर वे इस मामले को गंभीरता से नहीं लेते और आवश्यक सुधार नहीं करते, तो विपक्षी दल और नागरिक समाज इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतर सकते हैं।

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