
लखनऊ में अटल शताब्दी भारत भूषण सम्मान समारोह, 101 कर्मयोगी हुए सम्मानित
लखनऊ: ‘भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशताब्दी के अवसर पर बैदेही वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा लखनऊ स्थित ऑर्नेट होटल में “अटल शताब्दी भारत भूषण सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। यह समारोह अटल बिहारी वाजपेयी के लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्र के प्रति समर्पण और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित रहा। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 101 कर्मयोगियों को सम्मानित किया गया।
पारंपरिक शुरुआत, विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी
समारोह की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार अतिथियों के तिलक और स्वागत के साथ हुई।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह रहीं। उनके साथ आईएएस हीरा लाल (सचिव, राष्ट्रीय एकता विभाग) और सेवानिवृत्त श्रम आयुक्त ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का आयोजन बैदेही वेलफेयर फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. रूबी राज सिन्हा और मुख्य सचिव इंजीनियर प्रशांत प्रवीण सिन्हा के नेतृत्व में किया गया। आयोजन में अब्दुल वहीद (महामंत्री, पत्रकार एसोसिएशन), वामिक खान (अध्यक्ष, आर्टिस्ट एकेडमी) और परवेज अख्तर (ब्यूरो चीफ, पुलिस मॉनिटर) का विशेष सहयोग रहा।
समाज के 101 विभूतियों को मिला सम्मान
अटल जी की स्मृतियों को जीवंत रखते हुए समाज सेवा, पत्रकारिता, पुलिस बल, कानून और कला के क्षेत्र से जुड़ी 101 हस्तियों को शॉल और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में उप निरीक्षक गौरव कुमारी, वरिष्ठ पत्रकार जुबैर अहमद, राहुल कुमार सिंह (संपादक, यूपी पुलिस मॉनिटर), मोहम्मद अली साहिल, मिट्ठू रॉय, गुरमीत कौर, शरद मेहरोत्रा (आरोह वेलफेयर फाउंडेशन), आशुतोष अवधवाल (समाजसेवी), मुर्तुजा अली, रोशेल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेन्द्र शर्मा ‘अटल’, पंडित प्रेम नारायण शुक्ला, सैयद यावर हुसैन ‘रेशू’ और आरिफ ज्वेलर्स सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
“अटल जी विचारों की अमर विरासत हैं”
समारोह को संबोधित करते हुए फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. रूबी राज सिन्हा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि विचारों की ऐसी धरोहर थे जो आज भी समाज और देश को दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान समारोह का उद्देश्य उन निस्वार्थ सेवकों को सामने लाना है जो बिना किसी प्रचार के राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने भी अटल जी की साहित्यिक चेतना, लोकतांत्रिक सोच और सर्वसमावेशी राजनीति पर अपने विचार रखे। सभी ने आयोजन की गरिमा, अनुशासन और भव्यता की सराहना की।
