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मैं अल्लाह का पैग़म्बर हूँ; घाना एबो नोआह 

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मैं अल्लाह का पैग़म्बर हूँ;घाना एबो नोआह 

SOCIAL MEDIA VIRAL: आजकल सोशल मीडिया पर एक आदमी की चर्चा हो रही है जिसका नाम घाना एबो नोआह (Ghana Ebo Noah) बताया जा रहा है। वह अफ्रीका के घाना देश से है। इस आदमी ने 25 दिसंबर 2025 को यह दावा किया कि वह अल्लाह की तरफ से भेजा गया है और दुनिया खत्म होने वाली है। उसने यह भी कहा कि जैसे पुराने ज़माने में हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने कश्ती बनाई थी, वैसे ही वह भी एक कश्ती (नौका/जहाज़) बना रहा है ताकि कुछ लोगों को बचाया जा सके। इसी वजह से बहुत से लोग हैरान हैं और कुछ लोग डर भी रहे हैं।

 

यह आदमी खुद को नबी नूह से जोड़कर अपनी बात सही साबित करने की कोशिश कर रहा है। वह कहता है कि अल्लाह ने उसे खास इल्म दिया है और आने वाली तबाही की खबर पहले से बता दी है। कुछ वीडियो में दिखाया जा रहा है कि वह लकड़ी से कश्ती जैसी चीज़ बना रहा है, ताकि लोग उसकी बात पर भरोसा करें। इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है कि किसी ने नबी, रसूल या अल्लाह का भेजा हुआ होने का दावा किया और लोगों को डराया कि दुनिया खत्म होने वाली है।

अब अगर हम इस्लामी नजरिये से देखें तो इस्लाम इस बारे में बिल्कुल साफ और मजबूत बात करता है। इस्लाम के मुताबिक हज़रत मुहम्मद ﷺ आख़िरी नबी और रसूल हैं। उनके बाद कोई नया नबी, रसूल या अल्लाह की तरफ से भेजा गया इंसान नहीं आ सकता। जो भी आदमी यह दावा करे कि वह नबी है या अल्लाह ने उसे खास तौर पर भेजा है, तो इस्लाम ऐसे दावे को झूठ और गुमराही मानता है।

इसी तरह क़यामत (दुनिया का अंत) के बारे में इस्लाम कहता है कि उसकी तारीख का इल्म सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के पास है। न कोई नबी, न फरिश्ता, न कोई वली, और न ही कोई आम इंसान क़यामत की तारीख जान सकता है। जब खुद नबी मुहम्मद ﷺ को क़यामत की तारीख नहीं बताई गई, तो किसी और इंसान का तारीख बताना बिल्कुल गलत है।
हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का किस्सा कुरआन में मौजूद है, लेकिन वह अल्लाह के सच्चे नबी थे और उन्होंने अल्लाह के हुक्म से कश्ती बनाई थी। आज कोई इंसान नूह (अ.स.) से अपनी तुलना करे या कहे कि वह वही काम दोहरा रहा है, तो यह इस्लाम में सही नहीं माना जाता। नबी होना अल्लाह की तरफ से होता है, इंसान खुद से यह दर्जा नहीं ले सकता।
इस्लाम हमें यह भी सिखाता है कि डर फैलाने वालों से सावधान रहो। बहुत से लोग शोहरत पाने, पैसे कमाने या लोगों को कंट्रोल करने के लिए ऐसे दावे करते हैं। वीडियो, कश्ती, बड़ी-बड़ी बातें — ये सब देखने में असरदार लगती हैं, लेकिन सच्चाई कुरआन और सुन्नत से ही जाँची जाती है।
नतीजा यह है कि घाना एबो नोआह का दावा इस्लाम के मुताबिक गलत है। न वह नबी है, न क़यामत की तारीख जान सकता है, और न ही किसी इंसान को यह हक़ है कि वह लोगों को डरा कर अपने पीछे चलाए। एक मुसलमान का काम है कि वह ऐसे दावों से दूर रहे, अपने ईमान को मजबूत रखे और सिर्फ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की सिखाई हुई बातों पर भरोसा करे।
हर वीडियो, हर दावा और हर चमत्कार दिखाने वाला इंसान सच्चा नहीं होता। सच्चा रास्ता वही है जो कुरआन और सुन्नत ने बताया है। बाकी सब बातों को समझदारी से देखना चाहिए, न कि डर कर मान लेना चाहिए।

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